MP News: मध्य प्रदेश बोर्ड का रिजल्ट जारी हो चुका है. कई छात्र-छात्राओं ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और कुछ स्टूडेंट्स के लिए निराशा हाथ लगी है. लेकिन इस बार रिजल्ट से निराश दो स्टूडेंट्स ने सुसाइड कर लिया. इनमें से एक छिंदवाड़ा की 10वीं की छात्रा और मुरैना में 12वीं का एक छात्र शामिल है. वहीं उज्जैन की एक छात्रा ने रिजल्ट आने के बाद ब्रिज से छलांग लगा दी, हालांकि गनीमत रही कि छात्रा की जान बच गई.
बाथरूम में फंदे से लटकी मिली सानिया
10वीं की छात्रा छिंदवाड़ा के परासिया के मोहन नगर की रहने वाली थी. लेकिन एमपी बोर्ड का रिजल्ट आने के बाद सानिया हताश हो गई. सानिया बोर्ड एग्जाम में तीन विषयों में फेल हो गई थी. जिसके बाद से वह काफी दुखी हो गई थी. रिजल्ट आने के कुछ ही देर बाद वह बाथरूम में चली गई. घरवालों को कोई अंदाजा नहीं था कि सानिया बाथरूम में क्या करने जा रही है. इसके पहले कि परिवार के लोग कुछ समझ पाते सानिया ने फांसी लगा ली काफी देर तक जब सानिया वापस नहीं लौटी तो घर वालों ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया लेकिन दरवाजा अंदर से नहीं खुला, इसके बाद घरवालों ने जब दरवाजा तोड़ा तो 17 साल की सानिया फांसी के फंदे पर लटकी मिली.
सभी विषयों में फेल होने के बाद तमंचे से कनपटी पर गोली मारी
वहीं एमपी बोर्ड के रिजल्ट के बाद मुरैना में 20 साल के ऋतिक ने भी सुसाइड कर लिया. 12वीं पढ़ने वाला ऋतिक सभी विषयों में फेल हो गया था. रिजल्ट देखने के बाद ऋतिक खुद को संभाल नहीं सका और कनपटी पर तमंचा सटाकर खुद को गोली मार ली. जिससे मौके पर ही ऋतिक की मौत हो गई.
सप्लीमेंट्री आने पर ब्रिज से छलांग लगा दी
पूरा मामाला उज्जैन के नानाखेड़ा क्षेत्र की लोहार पट्टी का है. यहां पर रहने वाले एक 18 साल की छात्रा बुधवार को बोर्ड का रिजल्ट देखने के लिए एमपी ऑनलाइन सेंटर पहुंची थी. लेकिन रिजल्ट छात्रा की उम्मीदों के मुताबिक नहीं था. छात्रा की एक विषय में सप्लीमेंट्री आ गई थी. जिसके बाद वह इतना दुखी हुई की गोपालपुरा स्थित मक्सी रोड ब्रिज पर जाकर छलांग लगा दी. छात्रा के गिरने के बाद आसपास के लोगों ने उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया. गनीमत रही कि छात्रा जिंदगी बच गई. हालांकि छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई है. उसका एक हाथ और पैर फ्रैक्चर हो गया है.
खराब रिजल्ट से जिंदगी खत्म नहीं होती
एमपी बोर्ड का रिजल्ट बुधवार को जारी हो गया है. इसमें कई छात्र-छात्राओं ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है. लेकिन कई स्टूडेंट्स का रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. ऐसे में स्टूडेंट्स के आत्मघाती कदम उठाने की खबरें लगातार आ रही हैं. वहीं एजुकेशन फील्ड से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्टूडेंट्स के रिजल्ट अच्छा ना आने के बाद आत्मघाती कदम उठाने के पीछे एक बड़ा कारण अभिभावकों का दबाव भी होता है. अभिभावक अपने आसपास के दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं, और बच्चों पर बेहतरीन रिजल्ट लाने का दबाव डालते हैं. ये दबाव इतना ज्यादा होता है कि स्टूडेंट्स को लगता है कि खराब रिजल्ट से अच्छा तो ये होता कि वे अपनी जिंदगी ही खत्म कर लें.
ये कहानी सिर्फ बोर्ड एग्जाम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नीट और सिविल सर्विसेज एग्जाम में भी स्टूडेंट्स पर दबाव देखा जाता है. स्टूडेंट्स के सामने एक फिक्स मानक को सर्वश्रेष्ठ बनाकर रखा जाता है. ऐसे में अगर वे निर्धारित लक्ष्य तक प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं तो उन्हें जिंदगी खत्म कर लेना एक बेहतर विकल्प लगता है. बच्चों, अभिभावकों और समाज को ये समझना चाहिए कि किसी भी परीक्षा का रिजल्ट जीवन से ज्यादा बड़ा नहीं हो सकता है. ये महज जिंदगी का एक पड़ाव है.
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