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MP विधानसभा में रोजगार के सवाल पर सरकार ने पेश किए आंकड़े, बताया क्यों कम हुए ‘आकांक्षी युवा’ के रजिस्ट्रेशन

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MP News: मध्य प्रदेश में बेरोजगार शब्द को बदलकर ‘आकांक्षी युवा’ कर देने से क्या हालात बदले हैं. विधानसभा में सामने आए आंकड़े इस पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने जो जानकारी दी, उससे साफ है कि नाम बदलने के बावजूद रोजगार की तस्वीर बहुत उत्साहजनक नहीं है.

‘आकांक्षी युवा’ के क्यों कम हुए रजिस्ट्रेशन?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2018 से 2025 के बीच वर्ष 2023 में सर्वाधिक 13,71,134 युवाओं ने पंजीयन कराया, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर मात्र 1,75,369 रह गई. 31 दिसंबर को जीवित पंजीयन की संख्या 2023 में सबसे अधिक 33.13 लाख रही, जबकि 2020 में यह न्यूनतम 24.72 लाख थी. दिसंबर 2025 में प्रदेश में 25.96 लाख आकांक्षी युवा पंजीकृत हैं, जो दिसंबर 2018 की तुलना में 86 हजार कम हैं. मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में 31.55 लाख पंजीयन थे, जो जून 2025 तक घटकर 25.68 लाख रह गए. इसका कारण यह बताया गया कि यदि कोई युवा तीन वर्ष तक पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराता है तो उसका नाम स्वतः निरस्त हो जाता है.

लाखों युवाओं के नाम कटे, कई वर्गों के सामने आए आंकड़े

शैक्षणिक स्तर के आधार पर आंकड़े और भी चौंकाते हैं. दिसंबर 2021 में 10वीं उत्तीर्ण 8.07 लाख आकांक्षी युवा पंजीकृत थे, जो दिसंबर 2025 में घटकर 3.17 लाख रह गए. वहीं स्नातकोत्तर युवाओं की संख्या 2.27 लाख से बढ़कर 2.29 लाख हो गई.सामाजिक वर्ग के अनुसार अनुसूचित जाति वर्ग के पंजीयन 1.84 लाख से बढ़कर 4.71 लाख हो गए हैं. वहीं पिछड़ा वर्ग के पंजीयन 13.28 लाख से घटकर 10.55 लाख रह गए. अनुसूचित जाति वर्ग में महिलाओं की संख्या 2021 में 75 हजार थी, जो 2025 में बढ़कर 2.10 लाख हो गई। सामान्य वर्ग में महिलाओं की संख्या 4.53 लाख से घटकर 2.94 लाख रह गई.

सदन में मंत्री ने दी ऑफर लेटर की जानकारी

रोजगार मेलों और कंपनियों के ऑफर को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई. मंत्री के अनुसार वर्ष 2024-25 में 10 कंपनियों ने कुल 53,921 ऑफर लेटर जारी किए, जिनका औसत वेतन 5,000 से 28,000 रुपये प्रतिमाह के बीच रहा. इनमें भारतीय जीवन बीमा निगम ने 12,984, Larsen & Toubro ने 6,230 और SBI Life Insurance ने 4,402 ऑफर लेटर जारी किए. हालांकि सबसे अहम सवाल यह है कि इन ऑफर लेटर में से कितने युवाओं को वास्तविक ज्वाइनिंग मिली? मंत्री ने स्वीकार किया कि विभाग इस संबंध में कोई जानकारी संधारित नहीं करता. यानी ऑफर लेटर जारी होने के बाद कितने युवाओं को रोजगार मिला, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है.

आकांक्षी युवाओं को रोजगार का नहीं मेरा अवसर

प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि सरकार ने शब्दावली बदलकर बेरोजगारी की गंभीरता को हल्का दिखाने की कोशिश की है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार की जरूरत है. विधानसभा में रखे गए ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि केवल नाम बदलने से तस्वीर नहीं बदलती. अब सरकार को ‘आकांक्षा’ नहीं, ठोस ‘रोजगार’ के परिणाम दिखाने होंगे.

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