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Ujjain: धनतेरस पर 40 लाख रुपए के नोटों से सजा गजलक्ष्‍मी मंदिर, 501 लीटर दूध से हुआ अभिषेक

Gajalakshmi Temple, Ujjain

गजलक्ष्मी मंदिर उज्जैन

Ujjain News: उज्जैन के नई पेठ स्थित प्राचीन मां गजलक्ष्मी मंदिर में धनतेरस के अवसर पर भव्य सजावट की गई. मंदिर के गर्भगृह को 40 लाख रुपए के नोटों से सजाया गया, वहीं सुबह विधि-विधान से पूजन के दौरान मां गजलक्ष्मी का 501 लीटर दूध से अभिषेक किया गया. इस विशेष आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे.

मंदिर के पुजारी पंडित अवधेश शर्मा के अनुसार, गजलक्ष्मी मंदिर को करीब 2 हजार साल पुराना माना जाता है. धनतेरस की सुबह भक्त दूध और कमल के फूल लेकर मंदिर पहुंचे और माता को अर्पित किए. पूजन के बाद श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर से कौड़ी और पीले चावल वितरित किए गए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन वस्तुओं को घर में रखने से सुख-समृद्धि और धन-वैभव की प्राप्ति होती है. मंदिर के प्रवेश द्वार को भी आकर्षक रोशनी से सजाया गया है. धनतेरस से लेकर दीपावली के पड़वा तक मंदिर के पट खुले रहेंगे, जिससे श्रद्धालु इस दौरान मां गजलक्ष्मी के दर्शन कर सकेंगे.

करीब 100 लोगों ने जुटाए सजावट के लिए नोट

मंदिर के गर्भगृह और परिसर को सजाने के लिए कुल 40 लाख रुपए के नोट एकत्र किए गए. मंदिर से जुड़े करीब 100 लोगों ने इसमें सहयोग किया. सजावट में 500, 200 और 100 रुपए के नोटों का इस्तेमाल किया गया है. मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात किए गए हैं. इसके अलावा निगरानी के लिए 6 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. रतलाम के प्रसिद्ध लक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर यहां भी नोटों से सजावट की गई है.

एक ही पत्थर पर बनी है मां गजलक्ष्मी की प्रतिमा

पुजारी अवधेश शर्मा ने बताया कि मंदिर में स्थापित मां गजलक्ष्मी की प्रतिमा एक ही पाषाण से निर्मित है. इसे करीब 2 हजार साल पुराना और सम्राट विक्रमादित्य के काल का माना जाता है. प्रतिमा में माता ऐरावत हाथी पर पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सम्राट विक्रमादित्य मां गजलक्ष्मी को अपनी राजलक्ष्मी मानकर उनकी आराधना करते थे.

मंदिर की एक अन्य विशेषता यहां स्थापित भगवान विष्णु की दुर्लभ प्रतिमा है. मां गजलक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की प्रतिमा होने के कारण भी इस मंदिर का धार्मिक महत्व माना जाता है. धनतेरस पर विशेष पूजन और नोटों से सजीावट के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं का आकर्षण बना हुआ है.

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