Vistaar NEWS

Bhopal: भोपाल के आसमान में दिखा अनोखा ‘मून हेलो’, चांद के चारों ओर बना चमकदार घेरा

Bhopal Moon Ring

खगोलीय दृश्‍य की फोटो विस्‍तार न्‍यूज के साथी अनंत सिंह द्वारा ली गई है

Bhopal News: भोपाल में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात लोगों को आसमान में एक बेहद दुर्लभ और आकर्षक खगोलीय नजारा देखने को मिला. चांद के चारों ओर एक गोल और चमकदार घेरा दिखाई दिया, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 22 डिग्री लूनर हैलो या मून हेलो कहा जाता है. इस अद्भुत दृश्य ने शहरवासियों को रोमांचित कर दिया और कई लोगों ने इसे अपने कैमरों में कैद किया.

कैसे बनता है यह खगोलीय दृश्य?

आंचलिक विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना तब होती है जब चांद की रोशनी ऊंचाई पर मौजूद पतले बादलों में फैले सूक्ष्म बर्फीले क्रिस्टलों से होकर गुजरती है. ये क्रिस्टल प्रिज्म की तरह काम करते हैं और रोशनी को लगभग 22 डिग्री के कोण पर मोड़ देते हैं. इसी प्रक्रिया के कारण चांद के चारों ओर एक गोलाकार घेरा बन जाता है, जो हमें स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.

क्रिस्टल और रोशनी का संबंध

विशेषज्ञों ने बताया कि वायुमंडल में मौजूद ये बर्फीले कण अलग-अलग दिशाओं में फैले होते हैं, लेकिन केवल सही कोण पर स्थित क्रिस्टल ही रोशनी को हमारी आंखों तक पहुंचा पाते हैं. इसी वजह से यह घेरा साफ और आकर्षक रूप में नजर आता है.

रंगों का अद्भुत खेल

कई बार इस घेरे के अंदर की ओर हल्की लाल आभा और बाहरी किनारों पर नीले रंग की झलक भी दिखाई देती है. यह प्रभाव प्रकाश के विभाजन के कारण उत्पन्न होता है, जिससे यह दृश्य और भी सुंदर बन जाता है.

आकार पर किन चीजों का असर

वैज्ञानिकों के मुताबिक, आसमान में मौजूद आइस क्रिस्टल चांद की रोशनी को प्रतिबिंबित और अपवर्तित करते हैं, जिससे यह मून हैलो बनता है. इन क्रिस्टलों का आकार और चांद की स्थिति इस घेरे के आकार को प्रभावित करते हैं. आम तौर पर छोटे क्रिस्टल बड़े घेरों का निर्माण करते हैं. वहीं, यदि चांद क्षितिज के करीब होता है, तो वायुमंडल में प्रकाश के लंबे रास्ते तय करने के कारण यह घेरा थोड़ा अंडाकार भी दिखाई दे सकता है.

ये भी पढे़ं- Bhopal में मेट्रो अंडरग्राउंड दौड़ेगी, 3.39 किमी में दो स्टेशन बनाने के लिए खुदाई शुरू; जानिए कौन सा होगा रूट

Exit mobile version