Chiti Ki Chutney: लाल चीटियों से बनती है बस्तर की स्पेशल चापड़ा चटनी, चाव से खाते हैं आदिवासी
मुस्कान मिश्रा
चींटी की चटनी
बस्तर सिर्फ संस्कृति के लिए नहीं, अपने अनोखे खानपान के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है. यहां की सबसे चर्चित डिश है चीटियों से बनने वाली चापड़ा चटनी. हल्के लाल और भूरे रंग की ये खास चींटी सरई और आम के पेड़ों पर घोंसला बनाती है. स्थानीय बोली में इसे हलिया, चापड़ा और चेपोड़ा भी कहा जाता है. ग्रामीण घोंसले के रंग को देखकर ही बता देते हैं कि चींटियों ने अंडे दिए हैं या नहीं. मार्च से मई के बीच ये चींटियां सबसे ज्यादा अंडे देती हैं. पेड़ की टहनी को काटकर नीचे बिछाई गई चादर या जाल में घोंसले को गिराया जाता है. ताकि ऊंचाई से गिरने पर अंडे फूटे नहीं. तेज धूप में चींटियों को सुखाकर अदरक, लहसुन, मिर्च और धनिया के साथ सिलबट्टे पर पीसा जाता है. इसी से बनती है चटपटी और खट्टी चापड़ा चटनी. ग्रामीण मानते हैं कि इसके सेवन से लू और बुखार से राहत मिलती है. इसमें मौजूद फॉर्मिक एसिड और प्रोटीन शरीर की इम्युनिटी बढ़ाता है. कभी सिर्फ जंगलों तक सीमित रहने वाली ये चटनी अब शहरों के बाजारों में भी बिकने लगी है. पर्यटक भी बस्तर आकर इसके अनोखे स्वाद को चखना नहीं भूलते.