जबलपुर शहर से 40 किमी दूर है नर्मदा नदी पर बना बरगी डैम, यहीं 41 लोगों के साथ डूबा क्रूज
शिवेंद्र कुशवाहा
बरगी डैम जबलपुर
नर्मदा नदी पर बना जबलपुर का प्रसिद्ध बरगी डैम साल भर पर्यटकों के लिए खुला रहता है, जहां जलस्तर सही होने पर मुख्य रूप से नौका विहार का आनंद लिया जा सकता है. अक्टूबर से अप्रैल बरगी डैम घूमने का सबसे अच्छा समय माना जाता है, फिर भी मौसम के अचानक बिगड़ने के कारण यह दुखद हादसा हो गया. जबलपुर से 40 किमी दूर नर्मदा नदी पर बना बरगी डैम मध्य प्रदेश की एक पुरानी और बड़ी परियोजना है, जिसे 1974 से 1990 के बीच तैयार किया गया था. इस बांध के निर्माण के लिए कई गांवों को विस्थापित किया गया और आज इसका पानी जबलपुर, मंडला एवं सिवनी जैसे जिलों की सिंचाई और ज़रूरतों को पूरा करता है. जबलपुर-नागपुर हाईवे (NH-7) के पास बरगी गांव में स्थित होने के कारण इस बांध का नाम ‘बरगी डैम’ पड़ा है. यह डैम न केवल 90 मेगावाट बिजली बनाता है, बल्कि अपनी नहरों के जरिए कई जिलों की हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन की सिंचाई भी करता है. खेती और बिजली के साथ-साथ बरगी बांध का इस्तेमाल पर्यटन के लिए भी किया जाता है, जहां इसके विशाल झील में सैलानियों के लिए कई मौके मौजूद हैं. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने यहां रिजॉर्ट और बोटिंग जैसी सुविधाएं दी हैं, जिसके तहत लोग झील में क्रूज और नौका विहार का आनंद लेते हैं. बरगी डैम की तरह ही नर्मदा नदी पर इंदिरा सागर बांध बना है, जिसे ‘हनुवंतिया टापू’ के नाम से पहचाना जाता है. इसका जलाशय भारत के सबसे बड़े जल क्षेत्रों में से एक है, जहां बरगी की ही तरह सैलानियों के लिए बोटिंग की सुविधा उपलब्ध है.