Adhik Maas Somvati Amavasya 2026: 15 जून 2026 को अधिकमास की सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब अधिकमास की अमावस्या सोमवार को पड़ती है, तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. लगभग 30 साल पहले जुलाई 1996 में ऐसा संयोग बना था. अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, जबकि सोमवती अमावस्या भगवान शिव और पितरों की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है. इसलिए इस दिन किए गए जप, तप, दान और धार्मिक कार्यों को बहुत पुण्यदायी बताया गया है. मान्यता है कि यह तिथि व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक बदलाव लाने वाली होती है.
शुभ योग और ग्रहों का विशेष आशीर्वाद
पंचांग के अनुसार, इस बार सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है. कहा जाता है कि इन योगों में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है. चंद्रमा वृषभ राशि में, बुध मिथुन राशि में, गुरु कर्क राशि में और मंगल मेष राशि में स्थित रहेंगे. इन शुभ ग्रह स्थितियों के कारण यह दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और नए कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है.
मां दुर्गा की पूजा से मिलती है सकारात्मक ऊर्जा
सोमवती अमावस्या के दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा करने का महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि देवी दुर्गा की आराधना से राहु और केतु से जुड़े नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. ऐसे में इस दिन श्रद्धापूर्वक दुर्गा पूजा करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.
पीपल की परिक्रमा का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या पर विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना से पीपल के वृक्ष की पूजा करती हैं. इस दिन 108 बार पीपल की परिक्रमा करने की परंपरा भी है. इसकी पूजा करने से परिवार में खुशहाली, सौभाग्य और सकारात्मक वातावरण बना रहता है. यह उपाय पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और घर में सुख-शांति बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है.
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कालसर्प दोष से राहत के लिए करें रुद्राभिषेक
- ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उन्हें जीवन में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
- करियर में रुकावट, व्यापार में उतार-चढ़ाव, वैवाहिक जीवन में समस्याएं और मानसिक तनाव जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं.
- मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से रुद्राभिषेक करने पर शिव कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायता मिलती है.
