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भूलकर भी घर न लाएं इन 5 मंदिरों का प्रसाद, नहीं तो प्रेत-बाधाओं से हो जाएंगे परेशान

Temple Prasada rules

इन मंदिरों का प्रसाद घर न लाएं

Temple Prasad Rules: हिंदू धर्म को सबसे प्राचीन धर्मों में से एक माना जाता है. भारत के कोने-कोने में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और मंदिर स्थापित हैं. हर प्राचीन मंदिर का अपना अलग महत्व होता है. हिंदू बड़ी निष्ठा और भाव के साथ मंदिर का प्रसाद ग्रहण करते हैं. श्रद्धालु प्रसाद को भगवान के आशीर्वाद के रूप में ग्रहण करते हैं, जिससे सारे दुख और कष्ट दूर होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जिनका प्रसाद ग्रहण करना अशुभ माना जाता है.

ऐसा कहा जाता है कि इन मंदिरों का प्रसाद भूलकर भी अपने घर नहीं ले जाना चाहिए. इसके पीछे आध्यात्मिक विज्ञान, पौराणिक कथाओं और ऊर्जा संबंधी मान्यताओं का मिश्रण बताया जाता है. आइए जानते हैं उन मंदिरों के बारे में जिनका प्रसाद लेना अशुभ माना गया है.

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर

हनुमान जी के बाल स्वरूप को समर्पित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है, जहां लोग बुरी शक्तियों से छुटकारा पाने आते हैं. यहां का सख्त नियम है कि भक्त प्रसाद या कोई भी खाने-पीने की चीज़ घर नहीं ले जा सकते.

मान्यता है कि यहां का प्रसाद घर ले जाने से नकारात्मक शक्तियां भी साथ चली आती हैं, इसलिए इसे मंदिर में ही खाना या छोड़ना पड़ता है.

कामाख्या मंदिर

गुवाहाटी का प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर अपनी तांत्रिक पूजा के लिए जाना जाता है. यहां ‘अंबुबाची मेले’ के दौरान मिलने वाले विशेष प्रसाद को घर ले जाना मना है.

माना जाता है कि इस प्रसाद में बहुत तेज ऊर्जा होती है, इसलिए इसे मंदिर के अंदर ही ग्रहण करना होता है.

कोटिलिंगेश्वर मंदिर

लाखों शिवलिंगों के लिए मशहूर कोटिलिंगेश्वर मंदिर का प्रसाद घर लाना वर्जित है. मान्यता है कि यहां चढ़ने वाले प्रसाद पर शिव भक्त चंडेश्वर का अधिकार होता है.

इसलिए, लोग इसे घर नहीं ले जाते क्योंकि ऐसा करने से दुर्भाग्य और परेशानियां आ सकती हैं.

काल भैरव मंदिर

उज्जैन का प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर अपने अनोखे नियमों के लिए जाना जाता है, जहां भगवान शिव के उग्र रूप को शराब का भोग लगाया जाता है.

Utkarshraj Atmaram

यहां की परंपरा के अनुसार, चढ़ाया गया यह प्रसाद केवल देवता के लिए होता है. इसे सामान्य प्रसाद की तरह भक्त अपने घर नहीं ले जा सकते हैं.

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नैना देवी मंदिर

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में स्थित नैना देवी मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है. यहांकी स्थानीय परंपरा के अनुसार, माता रानी को चढ़ाया गया कुछ विशेष प्रसाद घर ले जाना शुभ नहीं माना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के कारण भक्त इस नियम का पूरी श्रद्धा से पालन करते हैं और उस प्रसाद को मंदिर परिसर में ही छोड़ देते हैं.

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