Ujjain News: केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर जारी नए निर्देशों के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध की आवाजें उठने लगी हैं. सरकार ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान सम्मान देने और इसके सभी छह अंतरों को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने की बात कही है. इसी निर्णय के विरोध में उज्जैन में भी नाराज़गी सामने आई है.
इमाम ने सरकार के फैसले को बताया इस्लाम शिक्षा के खिलाफ
उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने इस फैसले को इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि मुस्लिम समाज इसे स्वीकार नहीं कर सकता. उनका कहना है कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत की अनुमति नहीं है, जबकि वंदे मातरम् के भाव उससे मेल नहीं खाते. उन्होंने कहा कि जिन सरकारी या निजी स्कूलों में वंदे मातरम को अनिवार्य किया जा रहा है, वहां से मुस्लिम बच्चों को हटाने की सलाह दी जाएगी.
वंदे मारतम बजने पर लोगों को खड़े होना अनिवार्य
सरकार के निर्देशों के अनुसार, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम् बजाए या गाए जाने के दौरान सभी लोगों का खड़े रहना अनिवार्य होगा. आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और जन गण मन दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम् गाया जाएगा.
इमाम ने की सरकार से आदेश वापस लेने की मांग
इमाम नासिर अली नदवी ने इस फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है. उनका कहना है कि इस तरह का निर्णय मुस्लिम समुदाय की आस्था के विपरीत है और इसे लागू करना कानून की भावना के अनुरूप नहीं है.
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