सावधान! फेक न्यूज फैलाने पर दर्ज हो सकती है FIR, नए IT रूल्स के तहत होगी सख्त कार्रवाई, जानिए क्या हैं नियम
फेक न्यूज फैलाने पर हो सकती है FIR
New IT Rules Strict Action: सोशल मीडिया के इस दौर में आज हर किसी का अपना यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट है. इन प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए लोग बिना जांच-पड़ताल के फेक वीडियो, फोटो और खबरें अपलोड कर देते हैं. वहीं कई मीडिया चैनल्स भी टीआरपी (TRP) और फॉलोअर्स बढ़ाने के चक्कर में ‘ब्रेकिंग’ टैग लगाकर खबरें और वीडियो चला देते हैं. लेकिन अब सोशल मीडिया पर बिना जांचे-परखे किसी फोटो, वीडियो या खबर को अपलोड करना आपके लिए मुश्किल पैदा कर सकता है.
सरकार ने फेक न्यूज और डीपफेक कंटेंट पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति या संगठन जानबूझकर गलत जानकारियां फैलाता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज होगी और साथ ही उसे कानूनी तौर पर दंडित भी किया जाएगा.
फेक न्यूज को लेकर डीसीपी की अपील
इंदौर क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश डंडोतिया ने एक वीडियो शेयर कर लोगों से फेक न्यूज और गलत जानकारी फैलाने से बचने की अपील की है. उन्होंने कहा कि बिना जांच-पड़ताल के कोई भी जानकारी शेयर करना गंभीर समस्या बन सकता है. ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो सकती है. नए आईटी नियमों में भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है.
🛑 फेक न्यूज से रहें सावधान
— Home Department, MP (@mohdept) June 6, 2026
📱 सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को बिना सत्यापन के साझा न करें।
🔍 किसी भी समाचार, फोटो, वीडियो या संदेश को आगे भेजने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें।
– श्री राजेश दंडोतिया, DCP, क्राइम ब्रांच, इंदौर#CyberAwareness #Call1930 pic.twitter.com/DoEwcR5yLd
उन्होंने कहा कि किसी भी कंटेंट क्रिएटर, ब्लॉगर या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की जिम्मेदारी होती है कि वह जो भी पोस्ट या वीडियो शेयर करे उसकी सत्यता पहले जांच ले. आपके फॉलोअर्स आप पर भरोसा करते हैं, इसलिए उन्हें गलत या झूठी जानकारी नहीं देनी चाहिए. किसी भी खबर या कंटेंट को शेयर करने से पहले उसका फैक्ट चेक और सत्यापन करना बहुत जरूरी है. उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया का उपयोग करने की अपील की.
फेक न्यूज से बचने के लिए क्या हैं नियम?
- सरकार या अदालत के निर्देश मिलने के बाद सोशल मीडिया कंपनियों को भ्रामक, फेक और डीपफेक कंटेंट को 3 घंटे के अंदर हटाना होगा.
- AI की मदद से बनाए गए कंटेंट या डीपफेक वीडियो, फोटो पर स्पष्ट रूप से जानकारी देना जरूरी होगा कि यह AI से तैयार किया गया है.
- जानबूझकर झूठी या फेक खबर फैलाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी कानूनों के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है.
- अगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समय पर ऐसे कंटेंट को नहीं हटाते हैं, तो उनकी भी जवाबदेही तय की जा सकती है.
- ऑनलाइन, प्रिंट मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने पर कानूनी कार्रवाई होगी.
- किसी भी पोस्ट, वीडियो या खबर को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करना जरूरी है.
कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बढ़ी जिम्मेदारी
नए नियमों के बाद कंटेंट क्रिएटर्स, ब्लॉगर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है. अब उन्हें किसी भी जानकारी को पोस्ट करने से पहले उसके सही और विश्वसनीय होने की पुष्टि करनी होगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों तक केवल सही जानकारी पहुंचे और फेक न्यूज के प्रसार पर रोक लगाई जा सके.