मकर संक्रांति पर अंबिकापुर में सजा तिल के लड्डू का बड़ा बाजार, करोड़ों रुपये का बिक रहा

सरगुजा का स्थानीय गुड़ अच्छा होता है और यहां के गुड़ की क्वालिटी अच्छी होने के कारण मिठास भी अच्छी होती है.
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प्रतीकात्मक तस्वीर

Makar Sankranti: मकर संक्रांति के अवसर पर अंबिकापुर में तिल के लड्डू और तिलकुट सहित दूसरे तिल से बने व्यंजन का बाजार सज चुका है. अंबिकापुर में दर्जन घर से अधिक तिल के लड्डू बनाने वाले फैक्ट्री भी चल रहे हैं, जहां से तिल का लड्डू बनने के बाद छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में भेजा जाता है. अंबिकापुर में हर साल तिल से बनने वाले लड्डू और अनरसा सहित दूसरे प्रोडक्ट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. हर साल अंबिकापुर में डेढ़ से 2 करोड रुपए के तिल के लड्डू और तिलकुट बिक रहा है. यहां कई ऐसे दुकान है जो 70 सालों से तिल का लड्डू बनाकर बेच रहे हैं.

अंबिकापुर में पिछले 70 सालों से तिल का लड्डू बना रहे गुप्ता ब्रदर्स का कहना है कि लगातार तिल के लड्डूओं की मांग हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर बढ़ती जा रही है. वह पिछले तीन पीढ़ियों से तिल के लड्डू बना रहे हैं. अंबिकापुर में करीब 50 ऐसे लोग हैं जो तीन का लड्डू और दूसरे प्रोडक्ट बनाने का काम कर रहे हैं इसके लिए वे मध्यप्रदेश और झारखंड से तिल मंगा रहे हैं और मकर संक्रांति को देखते हुए 2 महीना पहले से ही लड्डू बनाने के काम में जुट जाते हैं. तिलकुट बनाने के लिए बिहार के गया से कारीगर पहुंचे हैं.

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लड्डू और तिलकुट का भाव बढ़ा

हालांकि, इस साल तिल के लड्डू और तिलकुट सहित अनरसा का रेट भी बढ़ गया है पिछले साल जहां तिलकुट और तिल का लड्डू ₹280 किलो मिल रहा था, लेकिन इस साल 300 से 340 रुपए किलो पहुंच गया है. अंबिकापुर के गुदरी चौक में तिल के लड्डू का व्यापार करने वाले राजीव गुप्ता ने बताया कि यहां का तिल का लड्डू छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग सहित तमाम दूसरे शहरों में भेजा जाता है. यहां के तिल के लड्डू की डिमांड इसलिए सबसे अधिक है क्योंकि यहां लोकल गुड़ का उपयोग लड्डू बनाने के लिए किया जाता है. सरगुजा का स्थानीय गुड़ अच्छा होता है और यहां के गुड़ की क्वालिटी अच्छी होने के कारण मिठास भी अच्छी होती है.

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