CG News: गांव में स्कूल नहीं, जंगल-नदी पार कर जाते हैं 10 KM दूर, कई बेटे-बेंटियों की छूट गई पढ़ाई
जंगल-नदी पार कर जाते हैं स्कूल
CG News: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्थित एक ऐसा गांव, जहां कक्षा आठवीं के बाद बच्चे आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए जंगल और नदी पार कर 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. यह संघर्ष लगातार चार सालों तक चलता रहता है तब कहीं जाकर वह बच्चे 12वीं पास कर पाते हैं. कई दशक से यहां के बच्चे इसी तरीके से संघर्ष कर रहे हैं. यहां के कई युवाओं ने इसी तरह के संघर्ष के साथ पढ़ाई पूरी करने के बाद सबसे अधिक सुरक्षा के सेक्टर में अपना लोहा मनवाया है. इस गांव के हर तीसरे-चौथे घर से कोई ना कोई युवक-युवती या तो फौज में है या फिर छत्तीसगढ़ पुलिस या फिर किसी दूसरी सरकारी सुरक्षा एजेंसी में. यही वजह है कि अब यहां के बच्चे मांग कर रहे हैं कि उनके गांव में सरकार को हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल खोलना चाहिए.
जंगल-नदी पार कर जाते हैं 10 KM दूर
छत्तीसगढ़ का बलरामपुर-रामानुजगंज जिला और उसका उधवाकठरा गांव, जो राजपुर जनपद पंचायत इलाके में आता है. यह पंचायत चारों तरफ से जंगल से घिरा हुआ है. एक तरफ घना जंगल तो दूसरी तरफ जंगल के साथ नदी और उसे नदी में कोई पुल भी नहीं है. वहीं, गांव में पढ़ाई के लिए महज मीडिल स्कूल तक की व्यवस्था है. यही वजह है कि यहां कक्षा आठवीं की परीक्षा पास करने के बाद बच्चों को नदी पार कर आगे की पढ़ाई के लिए गोपालपुर या जंगल पारकर गांव से 10 किलोमीटर दूर बरियों जाना पड़ता है. इसकी वजह से कई बच्चों ने अपनी पढ़ाई भी छोड़ दी खासकर लड़कियों की पढ़ाई अधूरी रह जा रही है.
बेटियों की पढ़ाई रह जा रही अधूरी
कुछ लड़कियां ही आगे की पढ़ाई पूरी कर पा रही हैं क्योंकि गांव में स्कूल नहीं होने और जंगल पार कर स्कूल भेजने से परिजन घबराते हैं. एक तरफ जहां सामाजिक तत्वों का खतरा होता है तो दूसरी तरफ जंगली जानवरों का खौफ बना रहता है. यह इलाका हाथी प्रभावित क्षेत्र है और कभी भी हाथी जंगल से निकलकर सड़क में आ जाते हैं.
छात्राओं ने बताया कि बारिश के दिनों में जब नदी में बाढ़ आती है तब कई दिनों तक स्कूल भी नहीं जा पाती हैं. इतना ही नहीं दूसरे दिनों में उन्हें स्कूल पारकर अपना ड्रेस भी बदलना पड़ता है क्योंकि कई बार पानी में उनका स्कूल ड्रेस भीग जाती है.
हालांकि इस गांव में सड़क पहुंच चुकी है, बिजली पहुंच चुकी है, लेकिन एजुकेशन का पूरा इंतजाम नहीं हुआ है. इस गांव में कब हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल की सुविधा हो पाएगी यह बड़ा सवाल है क्योंकि जंगल और नदी से घिरे हुए इस गांव में कई प्रतिभाएं हैं लेकिन अधूरी पढ़ाई के कारण वह निखर नहीं पा रही हैं. यहां कि बेटियों का कहना है कि वह पढ़ना चाहती हैं, आगे बढ़ना चाहती हैं लेकिन गांव में स्कूल नहीं होने की वजह से उनके सपने अधूरे हैं. इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक ने भरोसा दिलाया है कि जिला स्तर से प्रस्ताव मंगाकर सरकार को भेजा जाएगा और हाई स्कूल खोलने की प्रक्रिया की जाएगी.
अधिकारियों ने दिया आश्वासन
सरगुजा संभाग के शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक संजय गुप्ता ने कहा है कि इस गांव के आसपास कोई हाई स्कूल नहीं है. ऐसे में प्रस्ताव बनाकर सरकार को नए स्कूल खोलने के लिए भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे पहले जिले के अधिकारियों ने भी उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी थी, लेकिन अब विस्तार न्यूज से जब इसके बारे में पता चल रहा है तो जल्द ही प्रस्ताव भेजेंगे और यहां पर नए स्कूल की स्वीकृति दिलाने की पूरी प्रक्रिया की जाएगी.
उधवाकठरा पंचायत की बेटियों का सपना तभी सच होगा जब यहां हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल खुलेगा. वहीं, यहां पहले से चल रहे प्राइमरी और मिडिल स्कूल में शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सुधार की जरूरत है.