सतुआ बाबा ने की बुलडोजर की सवारी, करोड़ों की डिफेंडर और पोर्श कार भी चलाते नजर आए थे

काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुतआ बाबा का आश्रम है. इस आश्रम की स्थापना साल 1803 में हुई थी. इसे गुजरात के रहने वाले संत जेठा पटेल ने बनवाया था. जेठा पटेल ने गृहस्थ जीवन छोड़ दिया था और काशी में ही आकर बस गए थे. जेठा पटेल के बाद इस आश्रम के कई मुखिया बने. इस आश्रम के मुखिया को ही सतुआ कहते हैं.
Satua Baba was seen driving a bulldozer in the Magh Mela.

माघ मेले में सतुआ बाबा बुलडोजर चलाते नजर आए.

Satua Baba runs bulldozer: सतुआ बाबा उर्फ संतोष दास जी महाराज पिछले कुछ दिनों में लगातार चर्चा में हैं. वे करोड़ों रुपये की गाड़ियां चलाते नजर आ रहे हैं. अब वो बुलडोजर पर सवारी करते नजर आए हैं. माघ मेले में गुरुवार को उनके बुलडोजर की सवारी करने की खूब चर्चा हो रही है. उनका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

डिफेंडर और पोर्श कार में दिखे थे सतुआ बाबा

प्रयागराज का माघ मेला इस बार एक और वजह से चर्चा में है. वो है सतुआ बाबा के महंगे गाड़ियों को चलाते दिखना. सतुआ बाबा मेले में 3 करोड़ की डिफेंडर और साढ़े 5 करोड़ की पोर्श कार चलाते हुए नजर आए थे. लेकिन गुरुवार को उनका नया रूप दिखाई दिया. गुरुवार को संतोष दास बुलडोजर की सवारी करते हुए दिखाई दिए.

CM योगी के साथ अक्सर दिखाई देते हैं

सतुआ बाबा उर्फ संतोष दास जी महाराज अक्सर सीएम योगी के साथ दिखाई देते हैं. सतुआ बाबा पीले वस्त्र धारण किए रहते हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से महंगी गाड़ियां चलाते हुए नजर आ रहे हैं. सतुआ बाबा काशी के रहने वाले हैं और सीएम योगी के करीबी संत बताए जाते हैं.

सतुआ बाबा क्यों कहा जाता है?

काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुतआ बाबा का आश्रम है. इस आश्रम की स्थापना साल 1803 में हुई थी. इसे गुजरात के रहने वाले संत जेठा पटेल ने बनवाया था. जेठा पटेल ने गृहस्थ जीवन छोड़ दिया था और काशी में ही आकर बस गए थे. जेठा पटेल के बाद इस आश्रम के कई मुखिया बने. इस आश्रम के मुखिया को ही सतुआ कहते हैं. आश्रम में बटुकों को वैदिक शिक्षा दी जाती है.

ये भी पढ़ें: पाकिस्तान के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद! वीजा पर लगाया बैन, शुरू हुआ गिड़गिड़ाना

ज़रूर पढ़ें