Ambikapur: जल जंगल बचाने के लिए बड़ा आंदोलन; सड़कों पर हजारों लोग, एक महीने का दिया अल्टीमेटम

Ambikapur: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. जानें पूरा मामला-
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अंबिकापुर में प्रदर्शन

Ambikapur News: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में आज जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए बड़ा आंदोलन किया गया. इसमें हजारों की संख्या में अलग-अलग इलाकों से महिलाएं, पुरुष और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे. अंबिकापुर के बीटीआई ग्राउंड में सभा का आयोजन किया गया. इसके बाद लोग नारेबाजी और तख्ती लेकर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. यहां प्रदर्शनकारियों ने जमकर प्रदर्शन किया और कहा कि अगर जल, जंगल और जमीन को बचाने के उनके अभियान को सरकार ने अनसुना किया तो आने वाले दिनों में इसका नतीजा ठीक नहीं होगा. साथ ही वृहद स्तर पर पूरे प्रदेश और देश में आंदोलन किया जाएगा. इस आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने कहा कि एक महीने बाद अगर सरकार इस हमारे आंदोलन को गंभीरता से नहीं लेगी तो अंबिकापुर में आंदोलन शुरू करेंगे और फिर वह आंदोलन लंबा चलेगा जब तक सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करेगी.

अलग-अलग जिलों से आए सामाजिक कार्यकर्ता

सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला और अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह के अलावा प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कई सामाजिक कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल हुए. इस दौरान प्रभावित लोगों ने अपने विचार साझा किया और कहा कि खदानों की वजह से उनकी जिंदगी तहस-नहस हो गई है. खेती की जमीन खत्म हो गई है, जंगल उजड़ चुका है, प्रदूषण चारों तरफ बढ़ गया है, रोजगार के दावे किए गए लेकिन बाहरी लोगों को ही सिर्फ रोजगार दिया गया और अब अपनी ही जमीन को गंवाने के बाद मजदूरी कर रहे हैं.

लोग बसों में सवार होकर आंदोलन स्थल तक पहुंचे और लोगों ने कहा कि उनके गांव में खदान खोले जा रहे हैं, जिसकी वजह से जंगल उजाड़ा जा रहा है और खेती की जमीन खत्म हो रही है. बलरामपुर जिले के इलाके से भी कई ग्रामीण पहुंचे हुए थे और यहां के लोगों को कहना था कि उनके गांव में खदान खोलने के लिए सर्वे का काम किया जा रहा है. इससे उनकी खेती की जमीन खत्म हो जाएगी. वहीं, दूसरी तरफ हसदेव क्षेत्र से भी हजारों की संख्या में ग्रामीण पहुंचे और उन्होंने कहा कि अडानी के कोयला खदान की वजह से उनके क्षेत्र का पर्यावरण बुरी तरीके से प्रभावित हो रहा है. रामगढ़ पहाड़ टूट रहा है.

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दूसरी तरफ रायगढ़ और कोरबा के अलावा अलग-अलग जिलों से भी खदानों की वजह से प्रभावित लोग भी प्रदर्शन में पहुंचे. करीब 2 घंटे तक सभा के बाद लोग रैली की शक्ल में नारेबाजी करते हुए अंबेडकर चौक गांधी चौक होते हुए सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचे. यहां पर प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर घुसने से पुलिसकर्मियों ने रोक लिया तो लोग सड़क पर ही बैठकर प्रदर्शन करते हुए नजर आए. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपा.

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