Bijapur: इंद्रावती नदी में नाव पलटने से 4 लोग बहे, मां-बेटी का शव बरामद, बाजार से लौटते वक्त हुआ हादसा
इंद्रावती नदी में नाव पलटने से 4 लोग बहे
Bijapur: बीजापुर में इंद्रावती नदी में नाव पलटने से एक ही परिवार के 4 लोग तेज बहाव में बह गए और उनकी दर्दनाक मौत हो गई है. घटना के 18 घंटे बाद मां-बेटी के शवों को रेस्क्यू टीम ने खोज लिया है, जबकि पिता और एक बच्चे की तलाश अब भी जारी है. नाव में कुल 5 लोग सवार थे, जिनमें से एक महिला को स्थानीय लोगों ने बचा लिया था. इंद्रावती नदी के जिस घाट पर यह दर्दनाक हादसा हुआ है.ये वही जगह है, जहां से नक्सली कमांडर रूपेश ने अपने 200 से अधिक साथियों के साथ मुख्य धारा में लौटने के लिए नाव से इंद्रावती नदी को पार किया था.
इंद्रावती नदी में नाव पलटने से 4 लोग बहे, दो का शव बरामद
एक ही परिवार के 4 लोगों की जान चली जाने वाली घटना 21 जनवरी की शाम करीब 5 बजे भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के उसपरी के झिल्ली घाट पर हुई है. सभी पीड़ित इंद्रावती नदी पार स्थित बोड़गा गांव के रहने वाले थे. वे बाजार से अपने घर लौट रहे थे, तभी नाव अनियंत्रित होकर पलट गई. घटनास्थल जिला मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर है. रेस्क्यू और सर्च के लिए निकली नगर सेना की गाड़ी खराब होने की वजह से घाट पर मोटरबोट देर से पहुंची, जिसके कारण सर्चिंग का काम देर से शुरू हुआ था.
एक ही परिवार से पति-पत्नी और दो बच्चे सहित कुल 4 लोग लापता थे, जिनमें से एक महिला और उसकी दुधमुंही बेटी का शव निकाल लिया गया है जबकि बताया गया है कि जिस महिला को इस घटना में ग्रामीणों ने जिंदा बचा पाया था. वह रात में ही अपने गांव पहुंच गई थी.
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नक्सलवाद का झेल रहे दंश
इंद्रावती नदी के उस पार, अबूझमाड़ क्षेत्र में बसने वाले हजारों ग्रामीणों के लिए नक्सलवाद ने तीन दशकों से एक अदद पुल भी बनने नहीं दिया था. कहना गलत नहीं होगा कि सिर्फ इन तीन दशकों में ही 30 लोगों की जान तो सिर्फ इस नदी को पार करने के दौरान ही चली गई होगी और न जाने कितनी मौतें ऐसी हो चुकी होंगी. जिनके आंकड़े न माओवादियों की खोखली विचाधारा, न अस्पताल प्रबंधन और न ही किसी भी सिस्टम के पन्नों में दर्ज ही होंगे.
बता दें कि सुरक्षाबलों ने इस नदी पर भी पुल बनाने के काम को लगभग पूरा करने में बहुत बड़ा योगदान तो दिया ही है, साथ ही अबूझमाड़ के जंगलों में भी अब पक्की सड़क बहुत जल्द बनकर तैयार कर दी जाएगी और नदी के उस पार अबूझमाड़ के लोगों को भी बुनियादी सुविधाएं तो जरूर मिल सकेंगी.