बोर्ड परीक्षाओं की फीस बढ़ोतरी के खिलाफ NSUI का प्रदर्शन, माशिमं कार्यालय के बाहर गुल्लक के पैसे और जेवर लेकर बैठे
एनएसयूआई प्रोटेस्ट
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की फीस में की गई बढ़ोतरी के खिलाफ मंगलवार को राजधानी रायपुर में जबरदस्त विरोध देखने को मिला. एनएसयूआई के बैनर तले छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं ने माशिम कार्यालय के बाहर अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से प्रदर्शन किया, जिसने न सिर्फ प्रशासन बल्कि आम जनता का भी ध्यान खींचा।प्रदर्शन कर रहे छात्र अपने घरों से गुल्लक, जमीन के कागजात और सोने-चांदी के जेवर लेकर पहुंचे.
इन प्रतीकों के जरिए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवारों को अपनी जमा-पूंजी और संपत्ति बेचनी पड़ेगी. प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों का कहना था कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं बल्कि अधिकार है, और इसे आम परिवारों की पहुंच से बाहर करना अन्यायपूर्ण है. एनएसयूआई के प्रदेश महामंत्री हेमंत पाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बिना छात्रों और अभिभावकों से चर्चा किए अचानक फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है.
फीस में इजाफे का किया विरोध
उन्होंने बताया कि जहां पहले 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा की फीस 460 रुपये थी, उसे बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है. वहीं आवेदन फॉर्म का शुल्क 80 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है। इतना ही नहीं, कुल 22 अलग-अलग मदों में शुल्क बढ़ाया गया है, जिसका सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा. हेमंत पाल ने कहा कि राज्य के हजारों ऐसे परिवार हैं, जिनके लिए पहले से ही बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल है. किताबें, यूनिफॉर्म, कोचिंग और परिवहन का बोझ पहले से मौजूद है, और अब परीक्षा फीस बढ़ाकर शिक्षा को और महंगा बना दिया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और मंडल ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
आंदोलन नहीं रुकेगा- NSUI
एनएसयूआई नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा. पहले शिक्षा मंडल के अधिकारियों के कक्ष में जाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा, उसके बाद सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन किया जाएगा. उनका कहना था कि प्रदेश के गरीब परिवारों के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने स्कूलों की बदहाल स्थिति का भी मुद्दा उठाया.
उन्होंने कहा कि कई सरकारी स्कूलों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. कहीं शौचालय नहीं हैं, कहीं शिक्षक नहीं हैं, तो कहीं किताबें समय पर नहीं पहुंचतीं. ऐसे हालात में परीक्षा शुल्क बढ़ाना पूरी तरह से गलत और असंवेदनशील फैसला है. वहीं दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव पुष्पा साहू ने फीस बढ़ोतरी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों से किसी भी मद में शुल्क नहीं बढ़ाया गया था और यह निर्णय वित्त समिति की अनुशंसा पर लिया गया है.