बंगाल चुनाव खत्म होते ही I-PAC निदेशक को जमानत, ED की नरमी पर उठ रहे सवाल

I-PAC director Vinesh Chandel Bail: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विनेश चंदेल को राहत देते हुए जमानत दे दी. विनेश की गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई थी, जब पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी चरम पर थी.
Vinesh Chandel

विनेश चंदेल को मिली जमानत

Bengal: पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया खत्म होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रुख में बदलाव को लेकर सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तार किए गए I-PAC के निदेशक विनेश चंदेल को अब दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है. सबसे अहम बात यह रही कि सुनवाई के दौरान ED ने जमानत का विरोध नहीं किया, जिससे अदालत का फैसला आसान हो गया.

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंदेल को राहत देते हुए जमानत दे दी. यह वही मामला है जिसमें चुनावी माहौल के बीच ED की कार्रवाई ने राजनीतिक रंग ले लिया था. चंदेल की गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई थी, जब पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी चरम पर थी. I-PAC एक प्रमुख चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था है, जो सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के लिए काम करती रही है.

चुनाव से ठीक पहले हुई इस गिरफ्तारी को लेकर TMC ने उस समय तीखी प्रतिक्रिया दी थी. पार्टी के नेताओं का आरोप था कि यह कदम उनके चुनाव प्रचार को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना था कि I-PAC जैसे प्रोफेशनल कैंपेन मैनेजमेंट संगठन के एक अहम चेहरे की गिरफ्तारी से पार्टी की रणनीति और जमीनी अभियान पर असर पड़ना स्वाभाविक है.

ED पर उठे सवाल

अब जब चुनाव खत्म हो चुके हैं, उसी मामले में ED का जमानत का विरोध न करना कई सवाल खड़े कर रहा है. विपक्षी दलों और TMC समर्थकों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या जांच एजेंसियों की सख्ती और नरमी का समय चुनावी कैलेंडर से जुड़ा हुआ है. राजनीतिक दृष्टि से देखें तो I-PAC का रोल केवल रणनीति बनाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह डेटा, ग्राउंड फीडबैक और माइक्रो-मैनेजमेंट के जरिए चुनावी अभियान को धार देता है. ऐसे में चुनाव के बीच उसके एक प्रमुख निदेशक की गिरफ्तारी ने TMC के कैंपेन को झटका दिया था.

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ED ने नहीं किया जमानत का विरोध

हालांकि, ED की ओर से आधिकारिक तौर पर इस बदलाव पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन कोर्ट में जमानत का विरोध न करना अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर मामला इतना गंभीर था कि चुनाव से पहले गिरफ्तारी जरूरी थी, तो फिर चुनाव खत्म होते ही उसी मामले में नरमी क्यों? हालांकि, दूसरी तरफ जमानत मिलने के बाद निदेशक के वकील विकास पाहवा ने कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही नियमित जमानत याचिका दायर की थी. इस बीच ईडी ने सुनवाई से एक दिन पहले अपना जवाब दाखिल किया और जमानत का विरोध नहीं किया. पश्चिम बंगाल चुनाव खत्म होने के बाद जमानत मिलने के सवाल पर पाहवा ने कहा कि इसे मात्र संयोग भी माना जा सकता है. पाहवा ने इस पर अभी कोई निष्कर्ष निकालने को जल्दबाजी बताया.

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