क्या चुनाव के 3 साल बाद बदल जाएगा रिजल्ट? हाईकोर्ट के आदेश पर हुई पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती
शृंगेरी विधानसभा सीट पर तीन साल बाद वोटों की दोबारा गिनती
Karnataka Election controversy: देश में हाल ही में 5 राज्यों विधानसभा चुनाव कराए गए हैं, इनके नतीजों का लोग इंतजार कर रहे हैं. कई जगहों पर विवाद के बाद दोबारा मतदान कराया गया है. इन सब के बीच अब कर्नाटक में 3 साल पहले हुआ चुनाव चर्चा में आ गया है.
कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर करीब तीन साल पुराने चुनाव नतीजे अब फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं. हाई कोर्ट के आदेश पर कराई गई पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच नई सियासी लड़ाई छेड़ दी है.
री-काउंटिंग के बाद बीजेपी नेता डी.एन. जीवाराज ने दावा किया है कि उन्हें कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा पर 56 वोटों की बढ़त मिल गई है. वहीं कांग्रेस इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठा रही है . इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ बता रही है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल कर्नाटक में साल 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेगौड़ा ने बेहद मामूली अंतर सिर्फ 201 वोट से जीत दर्ज की थी. इसी करीबी मुकाबले को आधार बनाते हुए जीवाराज ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था. याचिका दायर करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सैकड़ों पोस्टल बैलेट गलत तरीके से खारिज किए गए थे.
हाईकोर्ट ने क्या सुनाया था फैसला?
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव अधिकारियों ने खारिज किए गए 279 पोस्टल बैलेट की फिर से जांच की और कुल वोटों की दोबारा गिनती की. इस प्रक्रिया में आंकड़ों में बड़ा बदलाव सामने आया था. राजेगौड़ा के वोट काफी घटे, जबकि जीवाराज की स्थिति मजबूत बताई जा रही है.
हालांकि, यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और इसे “सिस्टमेटिक साजिश” करार दिया है. वहीं बीजेपी का कहना है कि यह पारदर्शी प्रक्रिया है और इससे असली जनादेश सामने आया है.
चुनाव आयोग करेगा आखिरी फैसला
अब इस पूरे विवाद का अंतिम फैसला चुनाव आयोग के हाथ में है, क्योंकि कोर्ट ने केवल री-काउंटिंग का निर्देश दिया था, नतीजे घोषित करने का नहीं का आदेश नहीं दिया था. ऐसे में शृंगेरी सीट का असली विजेता कौन होगा, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक टकराव बढ़ाएगा. देखना होगा कि 3 साल से विधायक के पद पर काबिज नेता को हटना पड़ेगा या फिर वह पद पर बने रहेंगे.
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