एमपी का पहला रोबोटिक सेंटर बना मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल सागर, अब MAKO सिस्टम से होगा घुटने व हिप का प्रत्यारोपण

सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल (SMH) ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में विस्तार करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अब इस हॉस्पिटल में MAKO सिस्टम से घुटने व हिप का प्रत्यारोपण होगा.
Multispeciality Hospital Sagar

सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल

सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल (SMH) ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में विस्तार कर्ते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश का पहला ऐसा अस्पताल बनने का गौरव प्राप्त किया है, जहां अत्याधुनिक रोबोटिक-असिस्टेड सर्जिकल तकनीक माको रोबोटिक सिस्टम (MAKO Robotic System) स्थापित किया गया है. यह विश्वस्तरीय तकनीक मुख्य रूप से घुटने व हिप प्रत्यारोपण जैसी जटिल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में उपयोग की जाती है. विश्वप्रसिद्ध मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी स्ट्राइकर कॉर्पोरेशन (Stryker Corporation) द्वारा विकसित यह रोबोटिक सिस्टम सर्जन को अत्यधिक सटीकता, बेहतर नियंत्रण और सुरक्षित सर्जरी करने में सहायता प्रदान करता है.

मरीजों को कम होगा दर्द

इसके माध्यम से मरीजों को कम दर्द, कम ब्लड लॉस, तेज रिकवरी और लंबे समय तक बेहतर इम्प्लांट फिटिंग का लाभ मिलेगा. सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के 22 वर्षो के अनुभवी सीनियर ज्वाइंट रीप्लेस्मैंट, स्पोर्ट्स इंजरी एवं ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनोज नागर ने बताया कि अब भोपाल में AI आधारित हाई-प्रिसिजन जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक के साथ संभव हो सकेगी. उन्होंने कहा कि MAKO Robotic System वर्तमान समय की सबसे एडवांस, प्रिसाइज और सुरक्षित तकनीकों में से एक है. इसकी AI आधारित प्लानिंग, 3D मैपिंग और हैप्टिक कंट्रोल तकनीक तकनीक इसे पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अधिक प्रभाबशाली बनाती है.

पूरी तरह सर्जन-नियंत्रित तकनीक

डॉ. नागर ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह सर्जन-नियंत्रित तकनीक है. रोबोट स्वयं सर्जरी नहीं करता, बल्कि सर्जन को अत्यधिक सटीकता के साथ ऑपरेशन करने में सहायता देता है. उन्होंने बताया कि पहले जॉइंट रिप्लेसमेंट को लंबे दर्द और कठिन रिकवरी वाली प्रक्रिया माना जाता था, लेकिन रोबोटिक तकनीक ने इसे अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और कम दर्द वाला विकल्प बना दिया है. गंभीर व जटिल घुटने व हिप प्रत्यारोपण के मरीजों को अब दिल्ली, मुंबई, चेन्नई या हैदराबाद जैसे महानगरों का रुख करने की जरूरत नही पडे‌गी. अब यह अत्याधुनिक सुविधा भोपाल में उपलब्ध होने से प्रदेश के मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा.

ऐसे काम करता है माको रोबोटिक सिस्टम

  • माको रोबोटिक सिस्टम में सर्जरी पूरी तरह रोबोट नहीं करता, बल्कि सर्जन रोबोटिक आर्म की सहायता से ऑपरेशन करते हैं.
  • सर्जरी पूरी तरह से सर्जन के कंट्रोल मे होती है .
  • सर्जरी से पहले मरीज के जॉइंट का CT Scan कर उसे कंप्यूटर के माधयम से फीड किया जाता है . इसके आधार पर कंप्यूटर मरीज के जॉइंट का 3डी मॉडल तैयार करता है.
  • 3डी मॉडल आधार पर सर्जन पहले से तय करते हैं कि हड्डी का कितना हिस्सा हटाना है और इम्प्लांट किस स्थान पर लगाया जाएगा.
  • ऑपरेशन के दौरान “हैप्टिक” और “एक्यूस्टॉप” तकनीक सर्जन को निर्धारित सीमा से बाहर कट लगाने से रोकती है जिससे सर्जरी अधिक सुरक्षित और सटीक बनी रहती है.
  • साथ ही रीयल टाईम फीडबैक सिस्टम लगातार डेटा उपलब्ध कराता है जिससे इम्प्लांट की सही पोजिशनिंग और जॉइंट बैलेंस सुनिश्चित होता है.

माको रोबोटिक से प्रत्यारोपण के प्रमुख फायदे

  • पूरी तरह से सर्जन द्वारा कंट्रोल
  • अधिक सटीक और सुरक्षित सर्जरी
  • छोटा चीरा और कम टिश्यू डैमेज
  • ऑपरेशन के बाद कम दर्द
  • फास्ट रिकवरी
  • कम ब्लड लॉस
  • इम्प्लांट की बेहतर फिटिंग और लंबी उम्र
  • मरीज जल्दी चलने-फिरने लगता है
  • अस्पताल में रुकने का समय भी कम

प्रेस वार्ता के दौरान समापन सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. आदित्य अग्रवाल डायरेक्टर और सी.ई.ओं. डॉ अतुल अदानिया मौजूद रहे. डॉ अतुल अदानिया ने कहा, ‘सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की यह पहल मध्यप्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया अध्याय माना जा रहा है जिससे जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अब अधिक सुलभ, सुरक्षित और तकनीकी रूप से प्रदेश के मरीजो को घुटने व हिप रोग से निजात प्रदान करेगी. डॉ. आदित्य अग्रवाल ने कहा “हाई-प्रिसिजन से घुटने व हिप के प्रत्यारोपण की नई तकनिक से हमारी पूरी टीम विश्वस्तरीय चिकित्सा व उपचार प्रदान करने व मरीजों के देखभाल और इलाज के प्रयासों को जारी रखेंगी.’

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