CG News: खून की कमी से तड़पती रही युवती, समय पर रक्त नहीं मिलने से मौत, जिला अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
खून की कमी से युवती की मौत
CG News: दुर्ग जिला अस्पताल से व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला एक बेहद दुखद मामला सामने आया है. यहां एक 22 वर्षीय श्रमिक की बेटी दीपिका ने सिर्फ इसलिए दम तोड़ दिया क्योंकि उसे समय पर खून नहीं मिल सका. दीपिका के शरीर में खून की भारी कमी थी, जिसके चलते उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
दरअसल, बेटी की जान बचाने के लिए बेबस माता-पिता लगातार कई घंटों तक अस्पताल के चक्कर काटते रहे और खून के लिए डोनर की तलाश करते रहे. परिजनों का आरोप है कि उन्होंने डॉक्टरों के सामने हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं और गिड़गिड़ाए, लेकिन न तो उन्हें कोई डोनर मिला और न ही जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से रक्त की व्यवस्था की गई. आखिरकार आज दोपहर जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए दीपिका ने दम तोड़ दिया.
मौत के बाद अस्पताल परिसर में मचा कोहराम
युवती की मौत के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया. बेटी को खोने के गम में मां जमीन पर गिरकर बेहोश हो गई, वहीं पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. मृतक दीपिका ने 12वीं के बाद आईटीआई की पढ़ाई पूरी की थी और अपने गरीब माता-पिता का सहारा बनने के लिए एक कपड़े की दुकान में काम कर रही थी.
सिविल सर्जन ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा
इस गंभीर मामले पर सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसकी पड़ताल की थी. उन्होंने बताया कि युवती का इलाज चल रहा था और उसके शरीर में मात्र 5 ग्राम हीमोग्लोबिन था. उसे ओ पॉजिटिव रक्त लाने के लिए कहा गया था. सिविल सर्जन ने कहा कि यदि ब्लड बैंक ने रक्त नहीं दिया तो यह गलत है और उन्हें रक्त उपलब्ध कराया जाना चाहिए था.
उन्होंने कहा कि यदि परिजन सीधे उनके पास आते तो वे स्वयं रक्त की व्यवस्था करवा देते. इस मामले में संबंधित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका की जांच के लिए जांच बैठाई जा रही है. जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. घटना की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा और रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप
इधर मृतका दीपिका के माता-पिता का कहना है कि डॉक्टरों की लापरवाही से उनकी बच्ची की मौत हुई है. उनका कहना है कि यदि समय पर खून मिल जाता तो शायद उनकी बेटी की जान बच सकती थी. दीपिका के पिता मन्नूराम गाढ़ा ने बताया कि जब उनकी बेटी की तबीयत ज्यादा खराब हुई तो डॉक्टरों ने उन्हें ब्लड बैंक से रक्त लाने के लिए एक पर्ची दी थी. जब वे ब्लड बैंक पहुंचे और पर्ची दिखाकर रक्त की मांग की, तो कर्मचारियों ने उनसे पूछा कि क्या वे कोई डोनर लेकर आए हैं.
परिजनों ने लगाया डोनर लाने पर खून देने का आरोप
मन्नूराम गाढ़ा के अनुसार, उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि इतनी रात में वे डोनर कहां से लेकर आएंगे. उन्होंने अनुरोध किया कि फिलहाल रक्त दे दिया जाए, डोनर मिलते ही वे रक्तदान करवा देंगे. आरोप है कि इस पर ब्लड बैंक कर्मचारियों ने कहा कि जब तक डोनर लेकर नहीं आओगे, तब तक रक्त नहीं दिया जाएगा. परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही के कारण उनकी बेटी की मौत हुई है.
कलेक्टर से शिकायत करने पहुंचे परिजन
घटना के बाद परिजन और उनके रिश्तेदार जिला कलेक्टर से शिकायत करने पहुंचे. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. परिजनों का कहना है कि यदि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी गरीब मरीजों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
ब्लड बैंक प्रभारी ने आरोपों को बताया निराधार
इधर दुर्ग जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी जेपी मेश्राम ने परिजनों के आरोपों को खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि उनके अस्पताल में दीपिका नाम की किसी भी मरीज के लिए रक्त लेने संबंधी कोई पर्ची नहीं आई थी. उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध है और रात के समय भी किसी डोनर की अनिवार्य मांग नहीं की जाती.
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