एमपी में देश की सबसे बड़ी वाटर टनल तैयार, बंजर खेतों में पहुंचेगा नर्मदा जल, यहां जानें सुरंग की खासियत

Narmada Water Irrigation Project: मध्य प्रदेश की कटनी में देश की पहली और सबसे बड़ी वाटर टनल बनकर तैयार हो गई है. इसके जरिए नर्मदा का पानी विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा.
India Largest Water Tunnel

देश की सबसे बड़ी वाटर टनल

Narmada Water Irrigation Project: विंध्य क्षेत्र में नर्मदा का पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई देश के सबसे लंबी वाटर बनकर तैयार हो चुकी है. इसका निर्माण लगभग 12 किमी लंबी देश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद वाटर टनल का निरीक्षण करने शुक्रवार सीएम मोहन यादव पहुंचे. इस टनल का निर्माण कार्य बीते 1 दशक से चल रहा था. निर्माण कार्य पूरा हो जाने से विंध्य के किसान परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है. इस टनल के बन जाने से यहां के बंजर पड़े खेतों में नर्मदा का जल पहुंचेगा और इलाके में फिर हरी-भरी फसलें लहरा उठेगी.

17 साल में बनकर हुई तैयार

लभभग 17 साल में बनकर तैयार हुई देश की सबसे बड़ी इस भूमिगत जल सुरंग के जरिए पहली बार बिना किसी पंप या लिफ्ट के बरगी बांध का पानी विंध्य की धरती तक पहुंचेगा. ये केवल एक टनल नहीं बल्कि विंध्य क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था बदलने वाली एतिहासिक परियोजना मानी जा रही है.इससे जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित 6 जिलों के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी.

कब से शुरू होगा पानी?

ब्रेकथ्रू और परीक्षण की औपचारिकताओं के बाद अक्तूबर 2026 से टनल के जरिए सिंचाई और जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. इस महत्वपूर्ण काम को पूरा करने में आधुनिक तकनीक से लैस टनल बोरिंग मशीन का उपयोग किया गया. बताया गया कि स्लीमनाबाद के कठिन पठारी क्षेत्र को पार करना बड़ी चुनौती थी.

ये रही इस टनल की खासियत

  1. इस टनल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये बिना किसी भारी पंपिंग या बिजली खर्च के ढलान के सहारे पानी के को एक नदी बेसिन से दूसरे बेसिन तक पहुंचाने में सक्षम हैं.

2. इस परियोजना से कटनी सहित जबलपुर, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों को फायदा होगा. इस परियोजना से करीब 2.45 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी.

3. इस विशाल टनल का निर्माण विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की चट्टानों को काटकर किया गया है. इसे पूरा होने करीब 17 साल का समय लगा है.

4. इस मेगा प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 1400 करोड़ रुपये से लेकर 1600 करोड़ रुपये के बीच है.

5. ये टनल जमीन के अंदर 20 से 40 मीटर की गहराई पर बनाई गई है. इसलिए ये हाईवे, रेलवे लाइन और रिहायशी इलाकों के नीचे से सुरक्षित रूप से गुजरती है.

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