Bhind: ट्यूब के सहारे उफनती नदी पार कर स्कूल जाते हैं ये टीचर, जान हथेली पर रखकर संवार रहे बच्चों का भविष्य
ट्यूब के सहारे नदी पार करते शिक्षक
Bhind: मध्य प्रदेश में इन दिनों बारिश का दौर जारी है. इस वजह से कई जिलों में नदी-नालें उफान पर चल रहे हैं. मौसम विभाग लोगों से लगातार नदीं-नालों से दूरी बनाएं रखने की अपील कर रहा है. लेकिन भिंड से एक ऐसी तस्वीर सामने से सामने आई जिसने सभी को हैरान कर दिया है. भिंड जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर बबेड़ी पंचायत के मजरा नादरौली गांव में टीचरों को ट्यूब के सहारे नदी पार करके स्कूल जाना पड़ता है.
स्कूल पहुंचना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं
बारिश का मौसम इस गांव के लोगों के लिए अपने साथ कई मुसीबतें लेकर आता है. नादरौली गांव में बारिश के दिनों में शिक्षक का स्कूल पहुंचना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. बैसली नदी के जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने पर इसे पैदल पार करना मुश्किल होता है. ऐसे में ग्रामीण और सरकारी स्कूल के शिक्षक ट्यूब के सहारे नदी पार करते हैं.
नदी का बहाव तेज रहता तब…
गांव वालों ने बताया है कि बारसात के मौसम में जब नदी में बहाव तेज रहता है और पानी बढ़ जाता है तो प्राथमिक स्कूल के टीचरों को स्कूल जाने के लिए नदी को ट्यूब के सहारे पार करना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार गांव में नदी पार करने के लिए कोई पुल नहीं है इसके अलावा कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं.
ई-अटेंडेंस के लिए भी टाइम पर पहुंचना जरूरी
छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ प्राथमिक स्कूल के टीचरों पर ई-अटेंडेंस का भी प्रेशर रहता है जिसके कारण वह ट्यूब से नदी पार करते हैं. प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ टीचर राजेश भारती का कहना है कि कई बार नदी में कारण स्कूल पहुंचने में देरी हो जाती है. जिससे ई-अटेंडेंस नहीं लग पाती है. और इस वजह से या तो उनका वेतन कट जाता है या फिर रोक दिया जाता है. बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल पहुंचने के लिए शिक्षक को हर दिन जिंदगी और मौत के बीच का सफर तय करना पड़ता है.