CG News: अंबिकापुर में धान बेचने के बाद भी नहीं मिल रहे रुपये, किसानों ने किया जमकर प्रदर्शन

CG News: किसानों का कहना था कि वे यहां से 30 से 40 किलोमीटर दूर से हर रोज पैसा लेने के लिए आ रहे हैं. उसके बाद भी उन्हें लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है. लंबी लाइन में कई घंटे इंतजार के बाद उन्हें मात्र 20000 रुपये दिया जा रहा है.
formers are not receiving payments even after selling paddy farmers have staged protest

अंबिकापुर: धान बेचने के बाद भी किसानों को नहीं मिल रहा पैसा, किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया

CG News: अंबिकापुर में किसानों ने गुरुवार को सहकारी बैंक के बाहर चक्का जाम किया. किसानों का कहना है कि उन्हें धान बेचने के बाद जिला सहकारी बैंक से समय पर पूरा पैसा नहीं मिल रहे हैं. जिसकी वजह से उन्हें परेशान होने पड़ रहा है जबकि कई किसान शादी-विवाह और आगे की खेती की तैयारी के लिए रुपए की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब वे बैंक में पहुंचते हैं तब उन्हें मात्र 20-20 हजार रुपए दिया जा रहा है. कई ऐसे किसान हैं, जिन्होंने 4 से 5 लाख रुपए तक का धान बेचा है. उन्हें पूरा पैसा निकालने के लिए बैंक का 15-20 दिनों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

‘हर रोज 30-40 किमी दूर से आना पड़ रहा’

यही वजह है कि किसानों का गुस्सा आज फूट पड़ा. अंबिकापुर के आकाशवाणी चौक के पास स्थित जिला सहकारी बैंक के ब्रांच के बाहर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. किसानों का कहना था कि वे यहां से 30 से 40 किलोमीटर दूर से हर रोज पैसा लेने के लिए आ रहे हैं. उसके बाद भी उन्हें लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है. लंबी लाइन में कई घंटे इंतजार के बाद उन्हें मात्र 20000 रुपये दिया जा रहा है. जिनके पास चेकबुक है, उन्हें चेक से मात्र 49000 रुपये ही दिए जा रहे हैं.

ऐसे में किसान धान बेचने के बाद भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. किसानों ने करीब आधा घंटा तक सड़क पर प्रदर्शन किया. इसके बाद जब पुलिस की टीम पहुंची तब उन्हें समझाइश दी. सड़क में प्रदर्शन करने किसानों का कहना था की दरिमा में जिला सहकारी बैंक का एक ब्रांच खोलना चाहिए ताकि उन्हें लंबी दूरी का सफर न करना पड़े. अगर दरिमा में नया ब्रांच खुल जाता है तो आसपास के गांव के लोगों को अंबिकापुर नहीं आना पड़ेगा.

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‘किसानों को वितरण के लिए एक करोड़ मिल रहे’

दूसरी तरफ जिला सहकारी बैंक के ब्रांच मैनेजर का कहना है कि उन्हें हर रोज किसानों को वितरण करने के लिए सिर्फ एक करोड रुपए दिए जा रहे हैं. जबकि यहां किसानों के हिसाब से अगर देखा जाए तो दो से तीन करोड रुपए की जरूरत है. यही वजह है ऐसी स्थिति बन रही है.

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