‘पहले बस्तर नक्सलियों के डर से सहमा था, अब यहां की संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा…’,बस्तर पंडूम में बोले अमित शाह
बस्तर पंडुम में अमित शाह
CG News: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर पंडुम के समापन पर जगदलपुर पहुंचे.यहां उन्होंने तीन दिवसीय बस्तर पंडुम का समापन किया. अमित शाह के स्वागत में जगदलपुर के हजारों स्कूली बच्चों के द्वारा “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गाने में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुति दी. इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर जनजातीय समाज के जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों, हस्तशिल्प और कलाओं की जानकारी ली.
बस्तर नक्सलियों के डर से सहमा था, अब संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा – अमित शाह
अमित शाह ने बस्तर पंडुम में सभा को संबोधित करते हुए कहा पहले बस्तर नक्सलियों के डर से सहमा था, अब यहां संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने आगे कहा हमारी लड़ाई किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ है जो विकास में बाधा हैं.जो लोग सड़कों में, खेतों में, पगडंडियों में आईईडी लगाते हैं वो जरा भी नहीं सोचते कि उनका ही आदिवासी भाई का पांव उस पर पड़ेगा, वो हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएगा. उनको मालूम नहीं है कि कोई निर्दोष बच्ची बम से उड़ जाएगी. कहां से इतनी निर्दयता लेकर आए हैं.
मैं आज फिर से एक बार कहना चाहता हूं. पहले भी कई बार मैं कह चुका हूं.अभी भी जो बचे कुछे लोग हैं वो हथियार डाल दें. सरकार आपकी सभी प्रकार की चिंता करेगी. सम्मान के साथ आपका ध्यान रखा जाएगा. मैंने छत्तीसगढ़ के पुनर्वासन पैकेज को ध्यान से देखा है मैं मुख्यमंत्री जी और उपमुख्यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि इतना आकर्षक पुनर्वासन पैकेज कभी नहीं देखा.
माओवाद ने बस्तर को कितना नुकसान पहुंचाया? अमित शाह से सुन लीजिए…#AmitShah | Chhattisgarh | Amit Shah | #Bastar | #BastarPandum pic.twitter.com/CD9xPrr9us
— Vistaar News (@VistaarNews) February 9, 2026
बस्तर पंडुम में दिखी आदिवासी जीवन की झलक
केंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस व लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी की सराहना की. उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है.

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प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों का प्रदर्शन किया गया. जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं, वैद्यराज द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया. स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजन तथा लांदा और सल्फी पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए.