Bharat Bandh: रायगढ़ में खदानें बंद, परिवहन भी होगा प्रभावित, जानें भारत बंद से छत्तीसगढ़ में कौन से काम रहेंगे ठप

Bharat Bandh: आज देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने भारत बंद का ऐलान बुलाई है. ट्रेड यूनियन, किसान संगठनों और कई सामाजिक संगठनों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का आह्वान किया है. इसका असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा.
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Bharat Bandh: आज देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने भारत बंद का ऐलान बुलाई है. ट्रेड यूनियन, किसान संगठनों और कई सामाजिक संगठनों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का आह्वान किया है. इसका असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा. इसमें रायगढ़ में खदानें बंद, परिवहन भी प्रभावित रहेंगी.

भारत बंद का छत्तीसगढ़ असर

यूनियनों के मुताबिक हड़ताल श्रमिकों, कर्मचारियों और सार्वजनिक संस्थानों के हितों की रक्षा के लिए की जा रही है. प्रदेश भर में कई संगठनों ने हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है. हालांकि, चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस हड़ताल को समर्थन नहीं दिया है.

रायपुर में निकाली गई रैली

रायपुर में हड़ताल के समर्थन में बुधवार को कर्मचारी भवन बूढ़ापारा से मशाल रैली निकाली गई. रैली में बड़ी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सभा में बदल गई.

छत्तीसगढ़ में क्या-क्या रहेगा प्रभावित?

  • रायगढ़ जिले में भी ट्रेड यूनियन राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत विरोध प्रदर्शन करेंगे.
  • इंटक, एटक, सीटू और एचएमएस के सदस्य एसईसीएल की छाल खदान के पास धरना देंगे. इस दौरान कोल इंडिया की कोयला खदानों को बंद रखा जाएगा.
  • हड़ताल के चलते छाल, जामपाली, बरौद और बेजारी की कोल इंडिया खदानें प्रभावित रहेंगी.
  • खदानें बंद रहने से कोयला परिवहन भी पूरी तरह ठप रहेगा.
  • हालांकि स्कूल, प्रतिष्ठान और आवागमन सामान्य रूप से जारी रहेंगे.
  • इसके अलावा जीवन बीमा कार्यालय के पास भी एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जाएगा.

भारत बंद का ऐलान क्यों?

  • कई किसान, मजदूर और कर्मचारी संगठनों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं.

प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं.

  • भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध
  • चार नए लेबर कोड वापसी की मांग
  • सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का विरोध
  • पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
  • न्यूनतम वेतन में वृद्धि
  • निर्माण और बिजली क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा
  • कृषि संबंधित कानूनों और नीतियों में बदलाव की मांग

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