CGPSC भर्ती घोटाला: CBI की दलीलों से हाई कोर्ट सहमत, टामन सिंह सोनवानी और ललित गनवीर की दूसरी बार जमानत याचिका खारिज

CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ PSC भर्ती घोटाला मामले में दूसरी बार हाई कोर्ट ने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और उप नियंत्रक ललित गनवीर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है.
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) भर्ती घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु ने PSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और परीक्षा उप नियंत्रक ललित गनवीर की दूसरी बार जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं. न्यायालय ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं और यह घोटाला लाखों अभ्यर्थियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है. ऐसे में केवल लंबे समय से न्यायिक हिरासत में होने के आधार पर जमानत देना उचित नहीं होगा.

CBI ने बताया कि दोनों ने किया पद का दुरुपयोग

सीबीआई के अनुसार वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं. आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया. जांच में सामने आया कि एक निजी कंपनी से सीएसआर मद के तहत 45 लाख रुपए एक एनजीओ को दिए गए, जिसकी अध्यक्ष सोनवानी की पत्नी थीं। इसके बदले प्रश्नपत्र लीक किए गए.

सीबीआई का यह भी आरोप है कि उप नियंत्रक परीक्षा ललित गनवीर ने अध्यक्ष के निर्देश पर प्रश्नपत्र उद्योगपति श्रवण गोयल को उपलब्ध कराए, जिन्होंने आगे यह प्रश्नपत्र अपने बेटे और बहू को दिए. दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ. वहीं, सोनवानी के भतीजों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी पद पर हुआ.

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हाई कोर्ट ने कहा- जमानत देना न्यायोचित नहीं

आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि वे निर्दोष हैं. जांच लगभग पूरी हो चुकी है और सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है इसलिए समानता के आधार पर उन्हें भी राहत दी जाए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मनीष सिसोदिया बनाम प्रवर्तन निदेशालय फैसले का हवाला भी दिया. हालांकि, कोर्ट ने सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों आरोपी इस षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका निभाते प्रतीत होते हैं और मामले की आगे की जांच अभी शेष है. इसलिए वर्तमान चरण में जमानत देना न्यायोचित नहीं है. इस प्रकार, हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं.

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