Bastar Pandum: बस्तर पंडुम के कार्यक्रम में बदलाव, अब समापन इस तारीख को होगा

Bastar Pandum: 'बस्तर पंडुम' में बस्तर अंचल की लोककला, लोक नृत्य, लोक नाट्य, लोक गीत, पारंपरिक परिधान और व्यंजन, वाद्य यंत्र, वेश भूषा आदि देखने को मिलेगा. इस कार्यक्रम को अब राष्ट्रीय पहचान मिल गई है.
There has been a slight change in the dates for the Bastar Pandum event.

सांकेतिक तस्वीर

Bastar Pandum: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बस्तर पंडुम-2026 कार्यक्रम में आंशिक बदलाव किया गया है. इस कार्यक्रम का आयोजन 6 से 8 फरवरी 2026 को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में किया जाएगा. बस्तर पंडुम में जिला स्तर पर आयोजित कलाकार शामिल होंगे. ये 12 अलग-अलग विधाओं से संबंधित होंगे.

क्या है ‘बस्तर पंडुम’ का शेड्यूल?

‘बस्तर पंडुम’ में बस्तर संभाग के सात जिलों बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, कांकेर और नारायणपुर के कलाकार भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम तीन चरणों में संपन्न होगा. पहले चरण में जनपद, दूसरे में जिला और तीसरे और आखिरी चरण में संभाग स्तर पर स्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी. प्रथम चरण 10 जनवरी से शुरू हो चुका है जो 20 जनवरी 2026 तक चलेगा. इसके बाद जिला स्तरीय स्पर्धा का दौर शुरू होगा यानी दूसरा चरण 24 से 29 जनवरी तक चलेगा. आखिरी और तीसरा चरण संभाग स्तर पर होगा. संभाग स्तर की तारीखों में संशोधन किया गया है.

‘बस्तर पंडुम’ में 12 विधाओं के कलाकार भाग लेंगे

‘बस्तर पंडुम’ में बस्तर अंचल की लोककला, लोक नृत्य, लोक नाट्य, लोक गीत, पारंपरिक परिधान और व्यंजन, वाद्य यंत्र, वेश भूषा आदि देखने को मिलेगा. इस कार्यक्रम को अब राष्ट्रीय पहचान मिल गई है. सीएम विष्णुदेव साय की पहल के बाद इसे आयोजित किया जा रहा है. ये लगातार दूसरा वर्ष है, जब इसे आयोजित किया जा रहा है.

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1200 कलाकारों ने भाग लिया था

पिछले साल ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन 4 अप्रैल 2025 को दंतेवाड़ा में किया गया था. इसमें बस्तर संभाग के सातों जिलों के साथ ही असम, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और ओडिशा राज्यों के 1200 कलाकारों ने भाग लिया था. इस कार्यक्रम में गोंड, मुरिया, मडिया हल्बा, धुरवा, दोरला आदि जनजातियों के सांस्कृतिक झलक देखने को मिली.

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