Bastar Pandum: राष्ट्रपति मुर्मू ने किया बस्तर पंडुम का शुभारंभ, 3 दिनों तक होगा जनजातीय संस्कृति के ‘महाकुंभ’ का आयोजन

Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ किया. अब 3 दिनों तक जनजातीय संस्कृति के 'महाकुंभ' का आयोजन किया जाएगा.
bastar_pandum_murmu

राष्ट्रपति ने किया बस्तर पंडुम का शुभारंभ

Bastar Pandum 2026: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की परंपरा, संस्कृति, खान-पान और लोकगीत-नृत्य अब पूरा देश जानेगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ किया. इस दौरान इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें ढोकरा आर्ट से बने कर्मा वृक्ष, कोसा शिल्प से तैयार गमछा भेंट किया.

बस्तर पंडुम का शुभारंभ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया. इससे पहले उन्होंने स्टॉल का निरीक्षण किया. इस कार्यक्रम में राज्यपाल रामेन डेका और सीएम विष्णु देव साय शामिल हुए. उनके अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और डिप्टी CM विजय शर्मा भी शामिल हुए.

राष्ट्रपति मुर्मू ने किया स्टॉल का निरीक्षण

बस्तर पंडुम के शुभारंभ से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वहां लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने आदिवासी संस्कृति और पंरपरा को करीब से देखा.

बस्तर पंडुम क्या है?

बस्तर पंडुम जनजातीय सांस्कृति का उत्सव है. दरअसल, पंडुम शब्द का मतलब उसत्व होता है. छत्तीसगढ़ में बस्तर पंडुम की शुरुआत साल 2025 में हुई थी. इस बार बस्तर पंडुम 7 फरवरी से शुरू होकर तीन दिन तक चलेगा. इस कार्यक्रम में बस्तर के पारंपरिक खान-पान, लोककला, संगीत, नृत्य और स्थानीय संस्कृति की प्रदर्शनी होगी. वहीं, इस कार्यक्रम का मकसद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की संस्कृति को पहचान दिलाना है. बता दें कि बस्तर पंडुम के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल होंगे.

ये भी पढ़ें- फैक्ट्रियों में मजदूरों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर CG हाई कोर्ट सख्त, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की कमी पर जताई गंभीर चिंता

बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश की 5वीं राष्ट्रपति हैं, जो जगदलपुर-बस्तर आई हैं. उनसे पहले देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. APJ अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल और रामनाथ कोविंद भी यहां आ चुके हैं.

ज़रूर पढ़ें