Surguja: एकलव्य स्कूल के बच्चों की हेयर ड्रेसिंग के नाम पर घोटाला, टेंडर के बाद भी छात्रों को नहीं मिल रहा फायदा

Surguja: सरगुजा जिले के एकलव्य स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की हेयर ड्रेसिंग के टेंडर में बड़ा गोलमाल सामने आया है. यहां पर सरकार ने प्रत्येक बच्चे की बाल कटाई के नाम पर ₹40 अधिकतम राशि तय किया हुआ है, लेकिन टेंडर में भाग लेने वालों ने 79 रुपए में हेयर ड्रेसिंग का टेंडर भरा.
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Surguja: सरगुजा जिले के एकलव्य स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की हेयर ड्रेसिंग के टेंडर में बड़ा गोलमाल सामने आया है. यहां पर सरकार ने प्रत्येक बच्चे की बाल कटाई के नाम पर ₹40 अधिकतम राशि तय किया हुआ है, लेकिन टेंडर में भाग लेने वालों ने 79 रुपए में हेयर ड्रेसिंग का टेंडर भरा.

हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद टेंडर को स्वीकृत कर लिया गया जबकि दोबारा प्रतिस्पर्धा कराया जा सकता था, दूसरी तरफ अब एकलव्य स्कूलों के हॉस्टल में पढ़ने वाले बच्चों की हेयर ड्रेसिंग नहीं हो पा रही है क्योंकि स्कूलो के प्रबंधन का कहना है कि उन्हें सरकार से इतने रुपए ही नहीं दिए जा रहे हैं जितने रुपए टेंडर में स्वीकृत किया गया है, ऐसे में बच्चे अपना पैसा लगाकर हेयर ड्रेसिंग करा रहे हैं.

एकलव्य स्कूल के बच्चों की हेयर ड्रेसिंग के नाम पर घोटाला

दरअसल, आवासीय एकलव्य विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की हेयर कटिंग के लिए आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त दफ्तर से अगस्त महीने में टेंडर जारी किया गया और दिखावे के लिए पूरी प्रक्रिया की गई, यह बात इसलिए क्योंकि बाल काटने के लिए जो टेंडर स्वीकृत किया गया. उसका रेट 79 रुपए था जबकि बड़ी संख्या में अगर बच्चों का बाल काटना हो तो मार्केट में कई सैलून वाले 40 से 50 रुपये तक में बाल काटने के लिए तैयार हैं. वहीं सरकार ने भी ₹40 प्रति बच्चों के हिसाब से बाल काटने का खर्च तय किया हुआ है और आदिवासी विकास विभाग के सभी हॉस्टल आश्रम में पढ़ने वाले बच्चों के लिए यह राशि तय की गई है लेकिन अफसरों की साफ नियत नहीं होने से बच्चों की बाल कटाई नहीं हो पा रही है क्योंकि पूरा मामला टेंडर में भरे गए अधिक रेट की वजह से उलझ गया है बच्चे सालों में जाकर अपना बाल कटवाने के लिए मजबूर है.

टेंडर के बाद भी छात्रों को नहीं मिल रहा फायदा

सरगुजा जिले में पांच आवासीय एकलव्य विद्यालय संचालित किया जा रहे हैं जिनमें करीब 1500 से अधिक बच्चे पढ़ाई करते हैं ऐसे में इन बच्चों की बाल कटाई में ही हर महीने 60 हजार रूपये खर्च किए जाने का प्रावधान है और यह आंकड़ा साल में 7 लाख रुपए से अधिक तक पहुंच जाता है. दूसरी तरफ अगर टेंडर के हिसाब से भुगतान किया जाता है तो यह आंकड़ा सीधे 2 गुना हो जा रहा है यही वजह है कि स्वीकृत किए गए टेंडर पर भी सवाल उठने लगे हैं तो दूसरी तरफ आवासीय एकलव्य विद्यालय के प्रिंसिपल भी टेंडर के स्वीकृत होने की वजह से हैरान दिखाई दे रहे हैं. इतना ही नहीं अगस्त महीने में टेंडर के बाद अनिल हेयर कटिंग नामक फर्म को टेंडर के तहत वर्क आर्डर जारी किया गया है लेकिन अब तक सिर्फ दो बार ही बच्चों की हेयर ड्रेसिंग कराई गई है.

एकलव्य आवासीय विद्यालय के प्रिंसिपल संतोष कुमार गोस्वामी का कहना है कि टेंडर विभाग के द्वारा कराया गया और ठेकेदार को 79 रूपये में बाल काटने का ठेका दिया गया, माह में एक बार हर स्टूडेंट का बाल काटना होगा लेकिन सरकार से हमे 40 रुपये ही बाल काटने के लिए दिया जाता है, ऐसे में हम 39 रुपये और कहां से देंगे, इसलिए दिक्कत आ रही है और विभाग के द्वारा टेंडर में रेट स्वीकृत किया गया है तो हम इस पर कुछ नहीं बोलेंगे.

गड़बड़ी को लेकर उठ रहे सवाल

सवाल इस बात का है कि आखिर बच्चों की हेयर ड्रेसिंग के लिए सरकार के द्वारा निर्धारित रुपए से अधिक में टेंडर क्यों स्वीकृत किया गया और सवाल इस बात का भी है कि आखिर गड़बड़ी करने के बाद अतिरिक्त राशि की भुगतान ठेकेदार को किस मद और बजट से की जाएगी, उम्मीद है कि इस पूरे मामले की जांच होगी और हर महीने बच्चों का हेयर ड्रेसिंग हो पाएगा.

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