भवानीदीन सैनी की 16 बर्षीय बेटी डॉली को एक साल के भीतर 7 बार सर्प के द्वारा काटे जाने की बात से सनसनी फैली हुई हैं डॉली व उसके परिजनो का कहना हैं की डॉली को सर्प दिखाई देता हैं.
भारत के लिए यह सिर्फ व्यापार का मामला नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का भी है. हम अपने मवेशियों को सिर्फ शाकाहारी चारा खिलाते हैं, और दूध को पवित्र मानते हैं. ऐसे में अमेरिका से आने वाले मांसाहारी दूध को अपने बाज़ार में बेचना भारत को मंज़ूर नहीं है.
शुक्रवार की सुबह, जब बच्चे स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे और स्कूल अपने रोज़मर्रा के कामों में लगे थे. तभी अचानक एक के बाद एक कई स्कूलों के ईमेल इनबॉक्स में धमकी भरे संदेश पहुंचने लगे. इन ईमेल्स में स्कूल परिसर में बम होने की बात कही गई थी.
पहलगाम हमले के बाद भारत चुप नहीं बैठा. उसने तुरंत 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया. इस ऑपरेशन के तहत एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका गया. उनके पास ठोस सबूत थे, जो बताते थे कि कैसे TRF ने पहलगाम में खून बहाया है और कैसे उसे पाकिस्तान की सरकार और लश्कर का पूरा समर्थन हासिल है.
अमेरिकी न्यूज पेपर वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया है कि पायलट सुमीत सभरवाल ने फ्यूल स्विच बंद कर दिया था. जिसको लेकर AAIB ने नाराजगी जाहिर की है. AAIB ने कहा कि विदेशी मीडिया ने बिना वेरिफाई किए निष्कर्ष निकालने की कोशिश की है
राजनीति में किसी की दुश्मनी स्थायी नहीं होती है और ये बात महाराष्ट्र की राजनीति में हालिया कुछ सालों की घटनाओं से बेहतर कौन बयां कर सकता है.
वहीं घटना को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर तंज कसा है. अखलेश यादव ने किसान की पिटाई का वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट कर लिखा- 'खाद मांगने पर अपमान. भाजपाई क्या आईना नहीं देखते?
कक्षा 7 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब “Exploring Society: India and Beyond (Part 1)” में मुगल साम्राज्य और दिल्ली सल्तनत से जुड़े अध्याय पूरी तरह हटा दिए गए हैं. पहले इन किताबों में 12वीं से 15वीं सदी के दिल्ली सल्तनत और 16वीं सदी में मुगल साम्राज्य की शुरुआत जैसे विषय शामिल थे.
जिस चंदन मिश्रा की हत्या हुई है, वह कोई आम अपराधी नहीं था. बक्सर का रहने वाला चंदन, लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय था. उस पर हत्या और गैंगवॉर से जुड़े दर्जनों मामले दर्ज थे. वह बेऊर जेल से इलाज के लिए पैरोल पर अस्पताल में भर्ती था.
सिक्के का दूसरा पहलू ये है कि सरकार पर इस "फ्री" बिजली का भारी बोझ पड़ने वाला है. जब सरकार मुफ्त में कुछ देती है, तो इसका मतलब ये नहीं कि उसकी कोई लागत नहीं होती. बल्कि, उस लागत को टैक्सपेयर्स यानी हम और आप जैसे लोग ही किसी न किसी रूप में चुकाते हैं.