सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुफ्त योजनाएं भले ही गरीबों की मदद करती हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि लोग इन योजनाओं का लाभ लेने के बजाय अपने प्रयासों से खुद को आत्मनिर्भर बनाएं. अगर लोग काम करेंगे तो न केवल उनकी स्थिति सुधरेगी, बल्कि देश की प्रगति में भी योगदान मिलेगा.
मध्य प्रदेश से आने वाले कई श्रद्धालुओं को प्रयागराज से 200 किलोमीटर पहले ही रोककर ट्रैफिक की स्थिति बताई गई, लेकिन उनकी आस्था के आगे यह अवरोध भी टिक नहीं पाया.
Dhirendra Shastri: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के धक्का देने वाले बयान पर जवाब दिया है. उन्होंने कहा- 'हम तो बालक हैं,वो तो महापुरुष हैं.'
आज से आठ साल पहले जो मुद्दा था, वह अब भी दिल्ली की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है. 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को झटका लगा है. पार्टी 62 सीटों से सीधे 22 सीटों पर आ गई है. वहीं कपिल मिश्रा करावल नगर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव भी जीत चुके हैं.
1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के समय, आचार्य सत्येंद्र दास रामलला की मूर्ति की रक्षा करने में आगे आए थे. वह उस समय रामलला की मूर्ति के पास खड़े हो गए थे, ताकि कोई नुकसान न पहुंचा सके.
अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का निधन हो गया है. पिछले कुछ दिनों से स्ट्रोक के कारण लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में भर्ती थे.
Weather Update: मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR के लिए किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की है. मौसम साफ बना रहेगा. वहीं अगले 48 घंटे तक तापमान में अंतर नहीं दिखाई देगा
विस्फोट के बाद सेना के अधिकारियों ने बिना समय गंवाए अतिरिक्त बल मौके पर भेजे. घायल सैनिकों को अस्पताल पहुंचाने के साथ ही आतंकवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन भी शुरू कर दिया गया. सेना के जवानों ने आतंकवादियों की तलाश में इलाके को घेर लिया, लेकिन अभी तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है.
निफ्टी भी इस गिरावट से अछूता नहीं रहा. 4 फरवरी के बाद से निफ्टी ने 3.17% तक की गिरावट देखी है. पिछले मंगलवार को निफ्टी 394.95 अंक गिरकर 22,986.65 पर पहुंच गया था. 5 दिनों से निफ्टी लगातार गिरावट की ओर बढ़ रहा है और निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय बन चुका है.
पंजाब के मुख्यमंत्री बनने का सवाल अरविंद केजरीवाल के सामने इस समय एक बड़ा राजनीतिक दांव है, लेकिन यह माना जा रहा है कि वह आग में हाथ जलाने की जोखिम नहीं लेंगे. पंजाब की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, जहां कानून व्यवस्था, ड्रग माफिया और महिला कल्याण जैसे मुद्दे पार्टी के लिए सिरदर्द बन चुके हैं, केजरीवाल के लिए पंजाब की कमान संभालना कोई आसान काम नहीं होगा.