2010 के दशक में सरकार के प्रोत्साहन योजनाओं और तकनीकी विकास के कारण इलेक्ट्रिक कारों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी. अब, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हुंडई, एमजी, किआ और बीवाईडी जैसी कंपनियां भारत में इलेक्ट्रिक कारों का निर्माण और बिक्री कर रही हैं. साथ ही, सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए कई नीतियां भी बनाई हैं
मंगलवार को प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ पर ममता बनर्जी ने ऐसा बयान दिया, जिससे सियासी हलचल बढ़ गई.
इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें छात्रा का एक बैचमेट, KIIT के तीन डायरेक्टर, और दो सिक्योरिटी गार्ड शामिल हैं. ओडिशा सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है.
बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन: एनडीए के साथ एकजुटता की लहर बीजेपी ने शपथ ग्रहण समारोह को सिर्फ एक राजनीतिक इवेंट के रूप में नहीं, बल्कि एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में तैयार किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनडीए के घटक दलों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सबको बुलाकर बीजेपी ने इस समारोह को एक 'पॉलिटिकल इवेंट' की जगह 'शक्ति प्रदर्शन' में बदल दिया है.
टीडीपी सरकार ने आदेश जारी कर कहा कि राज्य के सभी मुस्लिम कर्मचारी को 2 मार्च से 30 मार्च तक एक घंटा पहले कार्यालय छोड़ने की अनुमति दी जाएगी.
LIVE Updates: आज 19 फरवरी को दिल्ली के नए मुख्यमंत्री को लेकर जो सस्पेंस बरकरार है वह खत्म होने वाला है. बुधवार शाम को प्रदेश पार्टी मुख्यालय में BJP विधायक दल की बैठक में नए CM के चेहरे पर मोहर लगेगी.
सीएम ममता ने तंज कसते हुए कहा, "महाकुंभ का सम्मान मैं करती हूं, पवित्र गंगा का भी, लेकिन यहां कोई ठोस योजना नजर नहीं आ रही. कुछ वीआईपी के लिए 1 लाख रुपये तक के कैंप्स हैं, जबकि गरीबों के लिए कोई ध्यान नहीं."
रामलीला मैदान सिर्फ एक मैदान नहीं है, ये दिल्ली के इतिहास और राजनीति का दिल है. यह वो जगह है, जहां से आवाज़ उठी, जहां बदलाव की लहर चली, और जहां से सत्ता की राह बनी.
वरिष्ठता के आधार पर ज्ञानेश कुमार का चयन हुआ है और यह तय प्रक्रिया के मुताबिक भी है, लेकिन विपक्ष का मत है कि अगर पैनल की संरचना को लेकर ही कोर्ट में मामला लंबित है तो उसके पहले यह नियुक्ति होनी ही नहीं चाहिए थी.
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "यह दोहरे मापदंड की राजनीति है. आप खुद तो अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन दूसरों के बच्चों के लिए उर्दू को ज़रूरी बनाना चाहते हैं. क्या यह सही है? आप मौलवी बनाना चाहते हैं, कठमुल्लापन की ओर समाज को ले जाना चाहते हैं."