दिल्ली में आम आदमी पार्टी की मुफ्त योजनाओं ने पिछले कुछ सालों में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं. मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं के चलते AAP ने दिल्ली की जनता में एक मजबूत आधार तैयार किया है.
कुमार विश्वास के इस बयान के बाद, बाबा रामदेव ने ट्विटर पर अपना जवाब दिया. उन्होंने कहा, "कुमार विश्वास के पिता जी जब घर आते हैं तो उन्हें समझाते हैं, और कहते हैं कि बाबा के बारे में उल्टा बोलना छोड़ दे. उनके माता-पिता मेरे परमभक्त हैं."
गांव के अधिकांश निवासी मजदूर वर्ग से हैं, जो अक्सर व्यस्तता के कारण स्वच्छता का ध्यान नहीं रख पाते. स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की समस्याएं आमतौर पर साल में कुछ ही मामलों में देखी जाती हैं, लेकिन इस बार यह समस्या बहुत बड़ी संख्या में फैल गई है.
दिल्ली में कांग्रेस के सामने अब दोहरा संकट है – एक ओर जहां AAP और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर होगी, वहीं दूसरी ओर पार्टी को INDIA गठबंधन से भी बाहर होते हुए अपनी राह खुद तय करनी होगी. कांग्रेस के नेताओं को यह विचार करना होगा कि किस तरह से वे अपनी खोई हुई ताकत को फिर से हासिल कर सकते हैं.
जंगल की आग ने अन्य मशहूर हस्तियों को भी प्रभावित किया है. अभिनेता जेम्स वुड्स, कैमरून मैथिसन, रियलिटी टीवी सितारे स्पेंसर प्रैट और हेइडी मोंटाग, और गीतकार डायने वॉरेन ने भी अपने घरों को इस आग में खो दिया है.
आज से लगभग 200 साल पहले, 1833 में जब यूरोप में दास प्रथा का अंत हो गया, तब ब्रिटेन को अपनी कॉलोनियों में काम करने के लिए भारी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ी. ऐसे में गुलामी के शिकंजे में फंसे भारत से मजदूरों को खींचकर विदेश भेजने का सिलसिला शुरू हुआ.
LIVE: बीजेपी दिल्ली वालों के लिए 300 यूनिट तक बिजली फ्री करने का ऐलान शामिल हो साथ है. इसके साथ ही पार्टी मंदिरों और गुरुद्वारों जैसे धार्मिक स्थानों पर 500 यूनिट तक बिजली फ्री करने की भी योजना बना रही है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2015 में शुरू किया गया था. इसके तहत, निवेशक सोने में निवेश कर सकते थे. इसमें निवेश करने पर उन्हें सोने के बाजार भाव के हिसाब से लाभ तो मिलता ही था, साथ ही सरकार उन्हें सालाना 2.5% ब्याज भी देती थी.
Maha Kumbh 2025: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने महाकुंभ में मुस्लिमों के आने पर कहा- मक्का में 40 किलोमीटर दूर गैर मुस्लिम को रोक दिया जाता है. तो वो हमारे कुंभ में क्यों आना चाहते हैं. अगर वो हिंदुओं को मजारों पर जाने से रोक दें, तो इससे अच्छा कुछ नहीं होगा.'
देश में ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. पारिवारिक दबाव, आर्थिक समस्याएं और मानसिक तनाव ऐसे कई कारण हैं, जो लोगों को इस हद तक पहुंचा रहे हैं. आइए, समझते हैं कि इसके पीछे की असल वजहें क्या हैं और इसे कैसे रोका जा सकता है.