Manmohan Singh Funeral: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का आज दिल्ली के निगमबोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया. उनकी अंतिम यात्रा सुबह 9:30 बजे से दिल्ली स्थित AICC मुख्यालय से निगमबोध घाट पहुंचा.
नॉर्थ इंडिया में इस समय ठंड अपने चरम पर है. पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी हो रही है, तो वहीं मैदानी क्षेत्रों में बेमौसम बारिश ने ठिठुरन और बढ़ा दी है.
मनमोहन सिंह की सरकार को लेफ्ट का समर्थन था और ये खेमा अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील होने का विरोध कर रहा था.
इस बावड़ी का निर्माण बिलारी सहसपुर के राजा चंद्र विजय सिंह के शासनकाल में हुआ था. बावड़ी की देखरेख और इसके उपयोग का जिम्मा रानी सुरेंद्र बाला के पास था, जिन्हें यह रियासत के मैनेजर ने रहने के लिए दी थी.
K Annamalai: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने अपने घर के बाहर नंगे बदन खुद को 6 कोड़े मारे हैं. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है.
मक्की पर भारत और अन्य देशों में आतंकवाद फैलाने का आरोप था. 2023 में संयुक्त राष्ट्र ने उसे ग्लोबल आतंकवादी घोषित कर दिया था, जिसके बाद उसकी संपत्तियां जब्त कर ली गई थीं और उसे यात्रा व हथियारों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था.
संजय बारू लिखते हैं कि उन्होंने निजी कारणों से पीएमओ छोड़ा था. उनके मुताबिक, इसमें कोई शक नहीं कि 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत के आर्किटेक्ट मनमोहन सिंह थे, लेकिन उस जीत का श्रेय उनको नहीं मिला.
अमर सिंह ने एक सशक्त और विस्तृत नेटवर्क तैयार किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को राजनीतिक समर्थन दिलवाया. यह एक कड़ी राजनीतिक चतुराई और सहयोग का परिणाम था, जिसे उन्होंने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर किया.
Manmohan Singh: मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने की खबर पाकिस्तान के गाह गांव में पहुंची तो उनके बचपन के दोस्त, उनके जानने वाले लोग बहुत खुश हुए थे. इसके बाद साल 2008 में मनमोहन सिंह से मिलने उनके बचपन के दोस्त राजा मोहम्मद अली दिल्ली आए.
मनमोहन सिंह एक कद्दावर राजनीतिज्ञ नहीं थे, बल्कि वे एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री और पूर्व वित्त मंत्री थे. कांग्रेस के भीतर यह महसूस किया गया कि यदि किसी राजनीतिक व्यक्ति को पीएम पद पर बैठाया जाता, तो यह राहुल गांधी के लिए भविष्य को मुश्किल बना सकता था.