Weather Update: दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन बने हुए हैं जो राजस्थान के उत्तरी और यूपी के नॉर्थ वेस्ट में है. इसकी वजह से मौसम में बदलाव जारी रहेगा
राम मंदिर के निर्माण के बाद, अब मथुरा और काशी जैसे अन्य धार्मिक स्थलों का मुद्दा भी उभर सकता है. RSS और VHP के नेतृत्व में महाकुंभ में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है कि कैसे अन्य विवादित धार्मिक स्थलों पर भी न्याय मिल सकता है और इन स्थानों को धर्म की रक्षा के रूप में पुनर्निर्मित किया जा सकता है.
वैध पास रखने वालों को छोड़कर कनॉट प्लेस के आंतरिक, मध्य या बाहरी हिस्से में किसी तरह के वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी.
बाबा का असली नाम हरिश्चंद्र विश्वकर्मा है, और वे उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से हैं. 50 वर्षीय हरिश्चंद्र बचपन से ही आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित थे, लेकिन परिवार के डर के कारण वे अपनी बातों को खुलकर नहीं कह पाते थे. 16 साल की उम्र में उन्होंने समाज में फैली बुराइयों और नफरत के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया और घर छोड़ दिया.
पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) की एक संयुक्त टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की और शनिवार को बच्चे को बचा लिया. हालांकि, बच्चे को लेने वाले दंपति ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया.
कई उलझनों के बाद यह हाई प्रोफाइल केस अंततः बंद कर दिया गया. बिहार में इस केस को लेकर हलचल बनी रही, लेकिन न्याय का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं निकल सका. कुणाल किशोर ने अपनी किताब 'दमन तक्षकों का' में इस मामले की गहराई से जानकारी दी है.
केजरीवाल ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि बीजेपी वोटर लिस्ट में दखलअंदाजी कर रही है. उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने हाल ही में दो महीने तक घर-घर जाकर मतदाता पहचान पत्रों को अपडेट किया था, लेकिन अब केवल 15 दिनों में हजारों नए नाम किस प्रकार से जुड़े हैं?
सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि अगर लोग प्लेटफॉर्म पर सो रहे हैं तो उस वक्त सफाई करने के लिए उन्हें जगा देना चाहिए था.
भारत के 7वें प्रधानमंत्री वीपी सिंह का कार्यकाल 1989 से 1990 तक रहा. उनका निधन 2008 में हुआ था और जब उनकी मृत्यु हुई, तो उनके अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद उठा. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीपी सिंह के परिवार ने उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में करने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्हें इलाहाबाद ले जाकर संगम के किनारे उनका संस्कार किया गया.
Khan Sir: 27 दिसंबर को खान सर प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करने राजधानी के धरनास्थल गर्दनीबाग पहुंचे थे. लेकिन वहां उनके साथ जो हुआ उसे देख वह हैरान रह गए.