बलरामपुर में पेड़ लगाने में धांधली! उद्यान विभाग ने लाखों खर्च कर कागजों पर लाई हरियाली, 6 महीने में 90% पौधे खत्म

MP News: ग्राम पंचायत धंधापुर में उद्यान विभाग के द्वारा लाखों रुपए खर्च कर सितंबर अक्टूबर महीने में पौधरोपण का कार्य कराया गया. नियम के मुताबिक पौधा लगाने के दौरान अलग-अलग प्रकार की खाद का भी उपयोग करना था लेकिन सिर्फ गड्ढा खोदकर पौधा लगा दिया गया
Balrampur Tree Plantation Corruption Worth Lakhs of Rupees

बलरामपुर: पौधे लगाने में भ्रष्टाचार

MP News: बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत धंधापुर में उद्यान विभाग के द्वारा राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से करीब 15 लाख से अधिक रुपए खर्च कर 6 महीने पहले कई हेक्टेयर में पौधों पर का कार्य कराया गया था. लेकिन अब 90% पौधा मर चुके हैं. हैरानी की बात तो यह है कि इन पौधों को बचाने के लिए सीमेंट पोल लगाकर फेंसिंग भी की गई है.

पोल की क्वालिटी भी बेहद खराब है, जबकि इससे पहले भी सवाल उठाया गया था कि आखिर एक ही जमीन पर हर साल पौधरोपण के नाम पर भ्रष्टाचार क्यों किया जा रहा है. बताया जाता है कि पिछले एक दशक के भीतर यहां अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से पहले ही दो बार पौधरोपण किया जा चुका है, लेकिन पौधे नहीं बचे. यानी यह जमीन पौधरोपण के लिए नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की रोपणी साबित हो रही है.

पौधे लगाने में धांधली

ग्राम पंचायत धंधापुर में उद्यान विभाग के द्वारा लाखों रुपए खर्च कर सितंबर अक्टूबर महीने में पौधरोपण का कार्य कराया गया. नियम के मुताबिक पौधा लगाने के दौरान अलग-अलग प्रकार की खाद का भी उपयोग करना था लेकिन सिर्फ गड्ढा खोदकर पौधा लगा दिया गया. इसके बाद कुछ दिनों तक पौधों की देखरेख की गई लेकिन इसके बाद छोड़ दिया गया. हैरानी की बात तो यह है कि पहले ही यहां हो रहे गड़बड़ी के बारे में अधिकारियों को जानकारी स्थानीय लोगों के माध्यम से दी गई थी लेकिन इसके बावजूद इस पूरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई.

यही वजह है कि यहां पौधों में खाद और कीटनाशक सिर्फ कागजों में ही दिया गया है. सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहां बोरवेल भी है लेकिन उद्यान विभाग के द्वारा उसका अभी तक मरम्मत नहीं कराया गया और यही वजह है कि वह बंद पड़ा हुआ है और इसकी वजह से पौधों में सिंचाई नहीं की गई, जिसके कारण 40 डिग्री तापमान में पौधे झुलस कर मर गए, कई पौधों में दीमक लग गया तो कई पौधे खाद के आभाव में ग्रोथ नहीं कर सके.

निम्न स्तर का सामान इस्तेमाल किया गया

यहां पर 1125 पौधे उद्यान विभाग के द्वारा लगाए गए थे. इसके अलावा डीएमएफ मद से फेंसिंग की गई थी. इससे पहले इस जमीन पर 2005 में रतनजोत और एक एनजीओ के द्वारा राष्ट्रीय रेशम बोर्ड के माध्यम से 2011 में अर्जुन के पौधे लगाए गए थे. वह भी ऐसी ही लापरवाही की वजह से नहीं बचे थे. अब 2025 में लगे फलदार पौधों का भी वही हश्र हुआ है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधों को बचाने के लिए यहां जो फेंसिंग की गई है उसकी सीमेंट पोल की क्वालिटी बेहद खराब है और वह भी कुछ दिन में टूटकर गिर सकता है. बताया गया है कि जिस मापदंड किया कांक्रीट पोल यहां पर लगाए जाने चाहिए थे वह नहीं लगा, उसके बावजूद इंजीनियरों ने मूल्यांकन कर पूरा भुगतान करा दिया.

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