‘पेट्रोल-डीजल के दाम कम कराएं…’, रामभद्राचार्य से बोले भूपेश बघेल, कहा- अपने चेले धीरेंद्र शास्‍त्री को निर्देशित करें

CG News: भूपेश बघेल ने आगे कहा कि मैं रामभद्राचार्य जी से विनम्र निवेदन करता हूं कि वे अपने चेले धीरेंद्र शास्त्री जी को निर्देशित करें कि पेट्रोल-डीजल के दाम कम करवाएं.
Bhupesh Baghel (File Photo)

भूपेश बघेल(File Photo)

CG News: छत्तीसगढ़ में रामभद्राचार्य को लेकर की राजनीति में बयानबाजी तेज होती जा रही है. चरणदास महंत के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की है. भूपेश बघेल ने कहा कि रामभद्राचार्य जी गौ-भक्त हैं, राम भक्त हैं, तो वे यह बताएं कि मोदी जी ने गौ-मांस भक्षक कहे जाने वाले किरण रिजिजू को अपने मंत्रिमंडल में क्यों रखा है. क्या रामभद्राचार्य जी इसे उचित मानते हैं.

धीरेंद्र शास्‍त्री को निर्देशित करें

भूपेश बघेल ने आगे कहा कि मैं रामभद्राचार्य जी से विनम्र निवेदन करता हूं कि वे अपने चेले धीरेंद्र शास्त्री जी को निर्देशित करें कि पेट्रोल-डीजल के दाम कम करवाएं. भूपेश बघेल ने आगे तंज कसते हुए कहा कि रामभद्राचार्य जी बड़े ज्ञानी और गुणी हैं. मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि मोदी जी ट्रंप के सामने इतना झुक क्यों जाते हैं. आप अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर बताएं.

चरणदास महंत के बयान के बाद बढ़ा विवाद

रामभद्राचार्य का यह बयान उस राजनीतिक विवाद के बाद सामने आया है, जिसकी शुरुआत नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की टिप्पणी से हुई थी. महंत ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि वह रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानते और उनके अनुसार वे भाजपा के प्रचारक की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि वह उन्हें न जगद्गुरु मानते हैं और न ही गांव का गुरु.

धर्म और राजनीति पर छिड़ी बहस

यह बयान सामने आते ही प्रदेश में धर्म और राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई. भाजपा नेताओं ने इसे सनातन पर हमला बताते हुए कांग्रेस को घेरा, जबकि कांग्रेस की ओर से कहा गया कि बयान का संदर्भ पूरी तरह राजनीतिक था.

मनेंद्रगढ़ दौरे में दिया था बयान

दरअसल, 25 मई 2026 को नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और सांसद ज्योत्स्ना महंत मनेंद्रगढ़ पहुंचे थे. इस दौरान मीडिया से चर्चा में चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि रामभद्राचार्य धर्म के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और भाजपा के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं.

सांसद ज्योत्सना महंत ने भी रखी राय

वहीं, कोरबा सांसद ज्योत्सना महंतने भी इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए. उनके मुताबिक जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है. उन्होंने यह भी कहा कि वह रामभद्राचार्य से मिल चुकी हैं और उनकी कथा भी सुन चुकी हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों को हमेशा सेवा भाव के साथ काम करना चाहिए.

जगद्गुरुत्व को चुनौती स्‍वीकार नहीं

छत्तीसगढ़ के चिरमिरी में आयोजित रामकथा के दौरान उस समय माहौल अचानक गर्म हो गया, जब जगदगुरु रामभद्राचार्य ने मंच से अपने जगद्गुरु होने को लेकर टिप्पणी की. कथा सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु मौजूद थे. इसी बीच उन्होंने कहा कि यदि कोई उनके जगद्गुरुत्व को चुनौती देता है, तो वह उसे स्वीकार नहीं करेंगे.

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