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Bilaspur High Court News: लोक आयोग से रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी ही मांगी जा सकती है, हाई कोर्ट का फैसला

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कोर्ट (फाइल फोटो)

Bilaspur High Court News: बिलासपुर. हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार से जुड़े एक मामले में कहा है कि किसी लोक प्राधिकरण को ऐसी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश नहीं दिया जा सकता, जो उसके पास उपलब्ध या उसके नियंत्रण में ही नहीं है. जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें लोक आयोग को राज्य सरकार की कार्रवाई से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया था. (Bilaspur High Court RTI Lok Aayog Decision)

 कोरिया जिले के चिरमिरी निवासी राजकुमार मिश्रा ने 25 अक्टूबर 2014 को छत्तीसगढ़ लोक आयोग से जानकारी मांगी थी. उन्होंने आयोग की स्थापना से लेकर आवेदन की तारीख तक अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ राज्य सरकार से की गई सिफारिशों की जानकारी मांगी थी. इसमें यह भी जानकारी शामिल थी कि संबंधित लोगों के नाम, पद, पदस्थापना और राज्य सरकार ने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई.

लोक आयोग ने कहा- ऐसी जानकारी उपलब्ध नहीं

लोक आयोग के जनसूचना अधिकारी ने 21 नवंबर 2014 को जवाब दिया कि मांगी गई जानकारी उसके पास ऐसे व्यवस्थित रूप में उपलब्ध नहीं है और न ही उसे इस तरह से बनाए रखना या संरक्षित करना जरूरी है. इसके बाद मिश्रा ने प्रथम अपील की, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने के कारण अपील खारिज हो गई. बहाली का आवेदन भी स्वीकार नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील की.

सूचना आयोग ने 30 दिन में जानकारी देने कहा था

राज्य सूचना आयोग ने 15 जून 2018 को द्वितीय अपील स्वीकार करते हुए लोक आयोग को मांगी गई जानकारी 30 दिन के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. इसके खिलाफ लोक आयोग ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी. लोक आयोग की ओर से तर्क दिया गया कि आवेदक ने केवल आयोग के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अलावा राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी जानकारी भी मांगी थी. यह जानकारी लोक आयोग के पास उपलब्ध नहीं थी. (Bilaspur High Court RTI Lok Aayog Decision)

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