Bilaspur Local News: मकान से बेदखली पर हाईकोर्ट की रोक, कोर्ट का आदेश देखकर पुलिस को वापस लौटना पड़ा

बिलासपुर. ऋण वसूली के मामले में मकान का कब्जा लेने पहुंचे बैंक अधिकारियों और पुलिस को हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बाद वापस लौटना पड़ा.
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सीजी हाई कोर्ट

बिलासपुर. ऋण वसूली के मामले में मकान का कब्जा लेने पहुंचे बैंक अधिकारियों और पुलिस को हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बाद वापस लौटना पड़ा. जस्टिस एके प्रसाद की एकलपीठ ने मिर्जा शौकत बेग की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्धारित शर्तों के पालन पर याचिकाकर्ता के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगा दी. (Bilaspur High Court Eviction Stay Order)

अदालत ने बैंक सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी. याचिकाकर्ता ने परिवार के तीन अन्य सदस्यों के साथ डीसीबी बैंक से 13 लाख 54 हजार 658 रुपए का ऋण लिया था. इसके एवज में तालापारा स्थित 1020 वर्गफुट का आवासीय मकान बंधक रखा गया था. किस्तों का नियमित भुगतान नहीं होने पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बिलासपुर ने 30 जनवरी 2025 को बैंक को मकान का भौतिक कब्जा दिलाने का आदेश दिया था. इसके बाद बेदखली वारंट जारी किया गया. याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी), जबलपुर में चुनौती दी थी. (Bilaspur High Court Eviction Stay Order)

समय से पहले शुरू कर दी थी कार्रवाई

याचिका के अनुसार, न्यायाधिकरण ने निर्धारित शतों के अधीन मकान का कब्जा लेने पर रोक लगाई थी. याचिकाकर्ता ने जुलाई में दो किस्तों में 1,43,603 और 1,43,603 रुपए जमा कर दिया. याचिकाकर्ता का आरोप है कि न्यायाधिकरण में मामला लंबित होने और पीठासीन अधिकारी के अभाव में अगली तारीख 18 मई 2027 निधर्धारित किए जाने के बावजूद बैंक ने मकान खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी.

इसके लिए नायब तहसीलदार के कार्यालय से बेदखली वारंट जारी कराया गया. याचिकाकर्ता ने वारंट के निष्पादन पर रोक लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन के समक्ष भी आवेदन दिया, लेकिन 8 अक्टूबर को बैंक के अधिकारी पुलिस बल के साथ मकान का कब्जा लेने पहुंच गए. याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका पेश की. अदालत ने उसी दिन सुनवाई कर शतों के पालन पर बेदखली की कार्रवाई रोक दी. दोपहर 12:30 बजे आदेश की प्रति मौके पर मौजूद बैंक अधिकारियों और पुलिस को दिखाई गई, जिसके बाद कब्जा लेने की कार्रवाई रोकनी पड़ी और उन्हें वापस लौटना पड़ा. मामले में अब बैंक और अन्य पक्षकारों के जवाब के बाद आगे सुनवाई होगी.

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