Bilaspur: आईजी रामगोपाल गर्ग को राष्ट्रपति पदक, गरियाबंद में तोड़ी थी नक्सलियों की कमर

Bilaspur: गरियाबंद में नक्सलियों की कमर तोड़ने वाले आइजी रामगोपाल गर्ग को सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया जाएगा.
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आइजी रामगोपाल गर्ग

Bilaspur: गरियाबंद में नक्सलियों की कमर तोड़ने वाले आइजी रामगोपाल गर्ग को सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया जाएगा. इन्होंने अपनी सेवा के दौरान कुल 4 जिलों में एसपी का पद संभाला है. इममें से सबसे ज्यादा प्रमुख गरियाबंद रहा. गरियाबंद में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने क्सल आंदोलन के खात्मे के लिए महत्वपूर्ण काम किए. इस दौरान उन्होंनें जंगल के अंदर जाकर सुरक्षा के कैंप लगवाए साथ ही 20 साल के लिए मास्टर प्लान बनाया.

सुरक्षाबलों की मौजूदगी

जंगल के भीतर सुरक्षाबलों की मौजूदगी से ही आज प्रदेश नक्सल मुक्त हो सका है. आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया है कि साल 2011 से लेकर 2013 तक उनकी पोस्टिंग गरियाबंद में थी. इस दौरान नक्सलियों का आतंक अपने चरम पर था. नक्सिलियों को कुचलने के लिए उन्होंने सुरक्षाबल की जंगल के अंदर तक मौजूदगी को लेकर गंभीर प्रयास शुरू किया. आईजी रामगोपाल गर्ग ने गरियबाद के जंगलों में चार सुरक्षा कैंप लगाए.

नक्सलियों का मूमेंट कम

उनकी इस पहल से गरियाबंद में नक्सलियों का मूमेंट कम हो गया. राज्य सरकार को मौका मिला तो जंगलों में और ज्यादा सुरक्षा कैंप बढ़ाए गए. इसके बाद दूरस्थ, पहुंच से बाहर वाले इलाकों में जवानों की तैनाती बढ़ी और आगे चलकर यही पहल नक्सलियों के खात्में की असली वजह बनी. आइपीएस रामगोपाल गर्ग प्रदेश के चार जिलों में एसपी रहे। इसके साथ ही उन्होंने अलग-अलग पदों पर काम किया. इस दौरान उन्होंने बेहतर पुलिसिंग के लिए जवानों को प्रोत्साहित करते रहे. जिसके चलते उनके कार्यकाल में संबंधित जिलों में पुलिसिंग सख्त रही.

बीट प्रणाली और तकनीक का इस्तेमाल

आइजी रामगोपाल गर्ग ने बिलासपुर रेंज में पोस्टिंग के साथ ही बीट प्रणाली और तकनीक का इस्तेमाल करने थाना प्रभारियों को प्रोत्साहित किया. आइजी ने तकनीक को बढ़ावा देने के लिए पुलिसकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए. बीट प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए लगातार मानिटरिंग करने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए.

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