CG News: मुक्त विश्वविद्यालय शुरू करेगा पांच रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम, एक माह में तैयार होगी कार्ययोजना
बिलासपुर. पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पांच नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए विश्वविद्यालय में परिणाम आधारित प्रबंधन (आरबीएम) और स्नातक रोजगार-योग्यता ढांचे (ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी फ्रेमवर्क) पर तीन दिवसीय कार्यशाला एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू हुआ. कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग की इकाई सीओएल-सीईएमसीए, नई दिल्ली और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यशाला 29 अक्टूबर तक चलेगी. इसमें नए पाठ्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर एक माह के भीतर कार्ययोजना बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है. छत्तीसगढ़ की खनिज एवं वन संपदा तथा स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए, जो विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ रोजगार की संभावनाओं को भी मजबूत करें. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के 37 पाठ्यक्रमों की स्वाध्ययन सामग्री तैयार की जा चुकी है. अब उद्योगों की मांग, बदलती तकनीक और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर नए पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक कौशल से भी जोड़ना है.
बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन में रोजगार की संभावनाएं
सीओएल-सीईएमसीए के निदेशक डॉ. बी. शद्रेक ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं. उच्च शिक्षा संस्थानों को वर्तमान के साथ भविष्य की कौशल जरूरतों के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करना होगा. उन्होंने पारंपरिक पाठ्यक्रमों के पुनर्गठन, उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा, साक्षात्कार की तैयारी और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि रोजगार की बदलती प्रकृति को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था में कौशल आधारित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है.
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में रोजगार-योग्यता बड़ी चुनौती
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉ. सोमी अग्रवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं की रोजगार-योग्यता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है. मुक्त विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रमों को रोजगारोन्मुखी बनाकर विद्यार्थियों के लिए नए अवसर तैयार कर सकता है. कार्यशाला में परिणाम आधारित प्रबंधन के माध्यम से पाठ्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाने, डिजिटल दक्षता, संप्रेषण कौशल, समस्या समाधान, कौशल आधारित मूल्यांकन और माइक्रो-क्रेडेंशियल जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है. इन प्रयासों के जरिए विद्यार्थियों को रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है.
प्रवेश के साथ विद्यार्थियों को मिलेगी अध्ययन सामग्री
कुलपति प्रो. सारस्वत ने विद्यार्थियों को प्रवेश के साथ ही अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की योजना की भी जानकारी दी. इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से विभिन्न विषयों के वीडियो तैयार कर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है. इससे मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई में सुविधा मिलेगी और विषयों को समझना आसान होगा. कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रकृति जेम्स ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि विश्वविद्यालय के कुलसचिव चंद्रभूषण मिश्रा ने आभार व्यक्त किया.
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