पंडरिया शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 22 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश
कवर्धा. जनपद पंचायत पंडरिया में वर्ष 1998 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 320 पदों पर हुई भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है. ब्यूरो ने छह तत्कालीन लोकसेवकों और 16 चयनित अभ्यर्थियों सहित कुल 22 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), कवर्धा के न्यायालय में करीब 1000 पृष्ठों का चालान पेश किया है. मामले में फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, साक्षात्कार में अंकों की हेराफेरी, आरक्षण नियमों की अनदेखी और चयन समिति के सदस्यों पर अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप हैं.
इस मामले में तत्कालीन जनपद पंचायत अध्यक्ष अर्जुन तिवारी की 25 दिसंबर 1998 को की गई लिखित शिकायत के आधार पर अपराध क्रमांक 48/2000 दर्ज कर जांच शुरू की गई थी. लंबी विवेचना के बाद अब आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है.
साक्षात्कार से पहले ही जोड़ दिए गए अनुभव के अंक
जांच के अनुसार, मध्यप्रदेश पंचायत शिक्षाकर्मी नियम, 1997 के तहत पात्रता परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर रिक्त पदों की संख्या से तीन गुना अभ्यर्थियों की वर्गवार साक्षात्कार सूची तैयार की जानी थी. आरोप है कि तत्कालीन चयन समिति ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और साक्षात्कार से पहले ही अध्यापन अनुभव के बोनस अंक जोड़ दिए. इससे अभ्यर्थियों की वास्तविक मेरिट प्रभावित हुई और पात्र अभ्यर्थियों के स्थान पर कथित रूप से अपात्र अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया.
सामान्य महिला वर्ग के 49 पदों के लिए 160 महिलाओं को बुलाए जाने के बावजूद क्षैतिज आरक्षण और वर्गवार समायोजन के नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात भी जांच में सामने आई. दिव्यांग वर्ग के पदों पर भी योग्य और उपलब्ध अभ्यर्थियों की अनदेखी कर चयन प्रक्रिया अपनाने का आरोप है.
नियमित छात्र रहते अध्यापन अनुभव का दावा
जांच में दस्तावेजों के आधार पर यह भी सामने आया कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों ने जिन अवधि के अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे, उसी दौरान वे विभिन्न महाविद्यालयों में नियमित छात्र के रूप में अध्ययनरत थे और शासकीय छात्रवृत्ति भी प्राप्त कर रहे थे. आरोप है कि चयन समिति के समक्ष आपत्तियां दर्ज होने के बावजूद इन प्रमाणपत्रों को स्वीकार किया गया और संबंधित अभ्यर्थियों को अनुभव के बोनस अंक देकर नियुक्ति दी गई.
रिश्तेदारों को मनमाने अंक देने का आरोप
जांच में चयन समिति के कुछ सदस्यों पर अपने निकट संबंधियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप भी सामने आया. तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी तथा सदस्य बृजबिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा के निकट संबंधी भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थी थे. आरोप है कि संबंधित सदस्यों ने अपने रिश्तेदारों के साक्षात्कार में स्वयं शामिल होकर उन्हें मनमाने अंक दिए और अभ्यर्थियों से अपने पारिवारिक संबंधों की जानकारी पहले से घोषित नहीं की.
इनमें उग्रसेन चंद्रवंशी, नीरा चंद्रवंशी, विनीता वैष्णव, देवेश वैष्णव, स्वर्णा वैष्णव, कौशल्या वैष्णव और शैल तिवारी के नाम शामिल हैं.
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में चालान
ब्यूरो ने तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. भारती, अंबिका प्रसाद शांडिल्य, तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एन.एल. वस्त्रकार, तत्कालीन उप संचालक लोक शिक्षण एन.आर. वर्मा, चयन समिति अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी, सदस्य हरिराम धृतलहरे सहित 16 चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ चालान पेश किया है. आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत कार्रवाई की गई है.
मामले के तीन अन्य आरोपी अधिकारियों और समिति सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है. इसकी जानकारी भी न्यायालय को दे दी गई है. अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों पर विचार किया जाएगा.
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