Khairagarh: संगीत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पर छात्रा ने लगाया छेड़छाड़ का आरोप, पुलिस ने आरोपी को भेजा जेल

Khairagarh: खैरागढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. नाट्य विभाग के अधिष्ठाता डॉ. योगेंद्र चौबे के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद कुछ लोग इस मामले को प्रशासनिक षड्यंत्र बताने में जुटे हैं. जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें कही जा रही है.
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आरोपी प्रोफेसर

नितिन भांडेकर (खैरागढ़)

Khairagarh: खैरागढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. नाट्य विभाग के अधिष्ठाता डॉ. योगेंद्र चौबे के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद कुछ लोग इस मामले को प्रशासनिक षड्यंत्र बताने में जुटे हैं. जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें कही जा रही है.

क्या है पूरा मामला

दरअसल, 21 मार्च को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका का इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में प्रवास हुआ था। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन की व्यवस्थाओं में लापरवाही को लेकर कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा ने जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई थी। इसी कार्यक्रम में डॉ. योगेंद्र चौबे भी मौजूद थे, हालांकि, बाद में कलेक्टर और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बैठक के जरिए मामला आपस में गले मिल कर सुलझा लिया गया, लेकिन 24 मार्च को डॉ. योगेंद्र चौबे ने कुलपति को कलेक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत दी और इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. इसके बाद सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर विरोध भी शुरू हो गया था.

लेकिन, पुलिस के मुताबिक, यह यौन उत्पीड़न का मामला पहले से लंबित था और राष्ट्रीय महिला आयोग से 24 फरवरी को ही इसकी जांच के निर्देश मिले थे। पीड़िता की खराब तबीयत के कारण बयान दर्ज होने में देरी हुई, जिसके चलते एफआईआर दर्ज करने में भी विलंब हुआ.

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फीस कम करने के नाम पर प्रोफेसर ने की छेड़छाड़

पीड़िता ने 2018-19 में विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग में प्रवेश लिया था. विभागाध्यक्ष डॉ. योगेंद्र चौबे के अधीन पढ़ाई के दौरान कोरोना महामारी के कारण कक्षाएं ऑनलाइन हो गईं. इस दौरान पीड़िता की मां का निधन हो गया और उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. जब 2022-23 में उसने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए विश्वविद्यालय से संपर्क किया और फीस में छूट की मांग की, तो डॉ. चौबे ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश की. पीड़िता के मुताबिक, डॉ. चौबे ने पीड़िता की फीस भरने के बदले उसके साथ रात बिताने की शर्त रखी. जब पीड़िता ने इसकी शिकायत तत्कालीन कुलपति और कुलसचिव से की, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की. इसके उलट, डॉ. चौबे और उनके समर्थकों ने उसे धमकाया कि यदि उसने शिकायत वापस नहीं ली तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. मानसिक रूप से परेशान होकर पीड़िता इलाज के लिए दिल्ली चली गई, लेकिन वहां भी डॉ. चौबे ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे लगातार अश्लील संदेश और वीडियो भेजता रहा.

आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

पीड़िता ने 10 अगस्त, 29 अगस्त और 12 सितंबर 2023 को तीन बार लिखित शिकायत तत्कालीन कुलपति ममता चंद्राकर को दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद, जब उसने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अपनी शिकायत की स्थिति जाननी चाही, तो तत्कालीन कुलसचिव नीता गहरवार ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि वह अब विश्वविद्यालय की छात्रा नहीं है. थक हारकर, पीड़िता ने 6 अक्टूबर 2023 को राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई. आयोग ने 24 फरवरी 2025 को खैरागढ़ पुलिस अधीक्षक को जांच के आदेश दिए. पुलिस ने विस्तृत जांच के बाद आरोपी डॉ. योगेंद्र चौबे के खिलाफ पर्याप्त सबूत पाए, जिसके बाद 29 मार्च को एफआईआर दर्ज कर 30 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

खैरागढ़ पुलिस SDOP ने दी जानकारी

पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) आशा रानी ने बताया कि पीड़िता ने यह शिकायत 2023 में ऑनलाइन दर्ज कराई थी, जिसकी जानकारी खैरागढ़ पुलिस को हाल ही में 24 फरवरी 2025 को राष्ट्रीय महिला आयोग से प्राप्त सूचना के आधार पर हुई। चूंकि पीड़िता अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग से संबंधित है और मामले में जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया था, इसलिए एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं.

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रेम कुमार पटेल नें मामले की जानकारी देते हुए बताया की प्रोफेसर को निलंबीत कर दिया गया है साथ ही कुलपती महोदय को यदी कोई पत्र दिया गया होगा तो उसकी जाँच की जाएगी. फिलहाल कुलपती के तरफ से ऐसा कुछ नहीं आया है.

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