CG News: दांतों का पीलापन, झुकता शरीर…कोरबा में ‘धीमा जहर’ बन रहा पानी, 237 लोग फ्लोरोसिस के शिकार

Korba Water Fluorosis Health Crisis: कोरबा जिले में कई गांवों में पानी की विकराल समस्या बनी ही हुई है. ऐसे में फ्लोराइड से प्रभावित गांव और मरीजो के आंकड़े ने हैरान कर दिया है. फ्लोराइडयुक्त पानी लोगों के लिए धीमा जहर बन गया है.
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कोरबा में 237 लोग फ्लोरोसिस के शिकार

हरिश साहू (कोरबा)

237 People Affected Slow Poison: कोरबा जिले में कई गांवों में पानी की विकराल समस्या बनी ही हुई है. ऐसे में फ्लोराइड से प्रभावित गांव और मरीजो के आंकड़े ने हैरान कर दिया है. फ्लोराइडयुक्त पानी लोगों के लिए धीमा जहर बन गया है.

कोरबा में 237 लोग फ्लोरोसिस के शिकार

ये छोटे बच्चों के दांतों का पीलापन और बड़े बुजुर्गों की झुकती शरीर, कोई एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि जिले में 59 गांव के 237 लोगों की है. क्योंकि, ये 237 लोग फ्लोरिसिस के शिकार है. यह कोई बीमारी नहीं बल्कि धीमा जहर है. जो धीरे-धीरे शरीर की हड्डियों को कमजोर करके मौत की ओर धकेलता है. इसका जिम्मेदार कोई और नहीं, बल्कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की है. जिस विभाग का काम स्वास्थ्य के लिए शुध्द और पर्याप्त पानी दिलाना है. वह विभाग गांव वालों को साफ पानी दिलाने में असमर्थ है. यही वजह है लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने के लिए मजबूर है.

फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर लोग

‘बिन पानी जीवन सुन’ कुछ इसी तरह का वाक्य जिले के फ्लोराइडयुक्त पानी पीने वाले ग्रामीणों पर लागू होता है. क्योंकि पानी बिना जीवन व्यर्थ है. लेकिन, PHE विभाग साफ पानी ग्रामीणों को उपलब्ध नहीं करा पा रहा है. यही वजह है कि, लोगों की हड्डियां अब कमजोर हो रही है और दांतों में भी पीलापन आ चुका है.

कोई स्थाई इलाज नहीं

सबसे बड़ी बात यहां पर यह है कि, इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है. फ्लोरोसिस का शिकार होने वाले मरीज का जीवन भर इलाज चलता ही रहता है. इसको ठीक करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा है. मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया है कि, जिले में 59 गांव के 237 लोग इसके चपेट में है. स्वास्थ्य विभाग ने फ्लोरोसिस से प्रभावित गांव के लोगों का सैंपल लिया है. जिसमें 214 डेंटल के और 23 हड्डी के मरीज मिले है.

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1 साल के आंकड़ों ने चौंकाया

स्वास्थ्य विभाग को जहां से मरीज मिलते है. उस जगह के आंकड़े को PHE विभाग से साझा किया जाता है. जिससे वहां पानी की शुद्धता के लिए उपाय किया जाए, लेकिन यहां जो आंकड़े आये है. यह कोई 10 सालों का नहीं, बल्कि सिर्फ 1 साल का है. यही वजह है कि, इस बीमारी ने अब लोक स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदाय जल व्यवस्था की शुद्धता पर गहरे छाप छोड़ दिए है. 59 गांव और 237 लोगों के जीवन पर गहरा घाव पड़ा है. जिसका मरहम भी अब उपलब्ध नहीं है. ऐसी लापरवाही पर PHE विभाग के अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखने वाली बात होगी.

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