छत्तीसगढ़ में ट्रांसफर सिंडिकेट का खुलासा, 19 शिक्षकों के जारी किए थे फर्जी आदेश, 15 जिलों के DEO से मांगा जवाब
सांकेतिक तस्वीर
CG News: छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी तबादला आदेश जारी करने का मामला सामने आया है. विभागीय लेटरहेड, मंत्रालय की नकली सील और अवर सचिव आरपी वर्मा के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर 19 शिक्षकों और कर्मचारियों के ट्रांसफर आदेश जारी किए गए. मामला सामने आने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) में हड़कंप मच गया है.
15 जिलों के DEO को तीन दिन का अल्टीमेटम
फर्जी आदेशों में सहायक शिक्षक, व्याख्याता, प्रधान पाठक और व्यायाम शिक्षक के नाम शामिल हैं. हैरानी की बात है कि इन तबादलों की जानकारी संबंधित 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को नहीं थी. डीपीआई ने मामले की जांच शुरू करते हुए सभी संबंधित डीईओ से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है. शासन को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े में कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है.
तीन बिंदुओं पर मांगा जवाब
डीपीआई ने अधिकारियों से पूछा है कि फर्जी आदेश उनके कार्यालय तक कैसे पहुंचे, इनके आधार पर कितने कर्मचारियों को कार्यमुक्त किया गया या जॉइनिंग दी गई और मामले की जानकारी मिलने पर जिला स्तर पर क्या कार्रवाई हुई. रिपोर्ट मांगे गए जिलों में रायपुर, दुर्ग, बस्तर, बालोद, धमतरी, सरगुजा, कांकेर, कबीरधाम समेत कुल 15 जिले शामिल हैं. दोषी पाए जाने वाले शासकीय सेवकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है.
बिना सत्यापन कैसे हुई रिलीविंग और जॉइनिंग?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंत्रालय से आदेशों की पुष्टि किए बिना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों ने कर्मचारियों को रिलीव या जॉइन कैसे कराया. जांच में इस लापरवाही की भी पड़ताल की जाएगी.
2020 में भी सामने आया था मामला
स्कूल शिक्षा विभाग में ऐसा फर्जीवाड़ा पहले भी हो चुका है. 30 मार्च 2020 को अवर सचिव जनक कुमार के नाम से 21 व्याख्याताओं, शिक्षकों और एक क्लर्क के तबादले का फर्जी आदेश जारी किया गया था. मामला उजागर होने पर अवर सचिव ने नवा रायपुर के राखी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी.
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