Vistaar News Exclusive: पाई-पाई और डील का हिसाब! GST कमिश्नर खुद लाते थे प्रश्नपत्र, बिना पैसों के हुई होगी भर्ती ?
Vistaar News Exclusive: रोहित मिश्रा. रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य कर (जीएसटी) विभाग में वर्ष 2022 की सीमित प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक (राज्य) कर निरीक्षक के 42 पदों के लिए हुई इस पूरी चयन प्रक्रिया को विभाग ने आखिरकार शून्य घोषित कर दिया है और 7 जुलाई 2022 को जारी नियुक्ति आदेश को भी रद्द कर दिया गया है. इस पूरी धांधली को अगर जीएसटी के ‘पाई-पाई’ हिसाब और अंदरूनी डील के चश्मे से देखें, तो यह पूरा खेल किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. यहां ये बताना जरूरी है कि इस पूरे मामले में विभाग ने हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है.
आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरे खेल के वे रोचक और परत-दर-परत खुलासे. जो टीएल ध्रूव, रिटायर्ड विशेष आयुक्त और पूर्व जांच अधिकारी ने किए है.
खुद प्रश्नपत्र लाते थे कमिश्नर, रोस्टर और नियमों की उड़ाई धज्जियां
जीएसटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौरान समीर विश्नोई GST कमिश्नर थे (जिनका नाम कोयला घोटाले में भी आया था). इस पूरे खेल का आलम यह था कि परीक्षा की गोपनीयता ताक पर रखकर कमिश्नर खुद प्रश्नपत्र परीक्षा हॉल तक लाते थे. हालात यह थे कि पदों का वर्गवार आरक्षण रोस्टर तैयार ही नहीं किया गया था. परीक्षा में बैठने वाले 300 उम्मीदवारों के प्रवेश पत्र (Admit Card) और अटेंडेंस शीट का कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला. न तो कोई समेकित परिणाम तैयार हुआ और न ही कोई अंक तालिका (Result Sheet) बनाई गई, सीधे चयन सूची जारी कर दी गई.
शिकायतें दबाई गईं, पर RTI और विधानसभा में खुला राज
इस खेल के खिलाफ आवाजें शुरू से उठ रही थीं, शिकायतों को लगातार छिपाया जाता रहा और कई बार शिकायतें हुईं. जब सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, तो मजेदार बात यह थी कि RTI के अधिकारी वही लोग थे जो खुद चयन समिति में बैठे थे लिहाजा जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया गया. बात यहीं नहीं रुकी, विधानसभा में भी यह मुद्दा 4-5 बार जोर-शोर से उठा. दबाव इतना बढ़ा कि महज 6 महीने के भीतर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी, जिसमें कई योग्य उम्मीदवारों ने हिस्सा ही नहीं लिया.
पर्सनल लोन की चर्चा कनेक्शन
जांच टीम का हिस्सा रहे उक्त अधिकारी ने विस्तार न्यूज से बातचीत में कहा कि उन्हें ये भी सुनाई में आया कि जिन उम्मीदवारों का चयन हुआ था, उनमें से कई ने पर्सनल लोन ले रखा था जो इस पूरी भारी-भरकम डील की ओर इशारा करता है. हालांकि इस मामले में जिन कर्मचारियों का चयन किया गया था उनका बयान दर्ज नहीं किया गया है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर-पुस्तिकाओं (Answer Sheets) में गजब की समानता पाई गई और बिना किसी आधार के चुनिंदा चहेतों के अंक बढ़ाने के लिए धड़ल्ले से पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) कराया गया. चयन सूची आने से ठीक पहले खुद चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों और परीक्षा नियंत्रक ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था.
राजनीतिक स्तर पर क्लीन चिट, सारा खेल ‘समिति’ का!
पूर्व जांच अधिकारी और रिटायर्ड विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव ने विस्तार न्यूज से बातचीत में कहा है कि इस पूरे प्रकरण में किसी भी राजनीतिक दल, नेता या सरकार पर सीधा आरोप नहीं लगा है और न ही किसी बड़े नेता की सिफारिश का जिक्र सामने आया है. उन्होंने दावा किया कि यह पूरा का पूरा खेल चयन समिति और कमिश्नर के स्तर पर ही संचालित होता था.
सत्य की जीत: अब सब लौटेंगे अपने मूल पद पर
भले ही यह फर्जीवाड़ा लंबे समय तक छिपाने की कोशिश की गई हो, लेकिन आखिरकार जांच रिपोर्ट के आधार पर यह साबित हो गया कि सिस्टम में किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं.
चूंकि गड़बड़ियां इतनी व्यापक थीं कि यह तय करना नामुमकिन था कि असल मेरिट किसकी थी, इसलिए विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए सभी नियुक्तियों को निरस्त कर दिया है. अब इस परीक्षा के जरिए कर निरीक्षक बने सभी प्रभावित कर्मचारियों को उनके पुराने और मूल पदों पर वापस भेज दिया गया है जिन्होंने स्नातक करने के बाद 5 साल की सेवा पूरी कर इस परीक्षा में अपनी किस्मत आजमाई थी. उक्त अधिकारी ने कहा कि अब जाकर सत्य की इस जीत के साथ ही फर्जीवाड़े के इस बड़े खेल का अंत हो गया है.
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