Ambikapur News: कुंडला वसुंधरा सिटी के 110 भवनों पर कार्रवाई पर हाई कोर्ट की रोक, पुराने आदेश निरस्त

Ambikapur News: शहर के खरसिया रोड स्थित कुंडला वसुंधरा सिटी के 110 भवन मालिकों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर से बड़ी राहत मिली है. वर्षों से इन भवनों को हटाने की चल रही कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है. कोर्ट ने नगर पालिका निगम अंबिकापुर द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया है.
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Ambikapur News: शहर के खरसिया रोड स्थित कुंडला वसुंधरा सिटी के 110 भवन मालिकों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर से बड़ी राहत मिली है. वर्षों से इन भवनों को हटाने की चल रही कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य शासन द्वारा जारी भवन हटाने के आदेश और नगर पालिका निगम अंबिकापुर के आयुक्त द्वारा 7 दिसंबर 2016 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया है. हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को मामले में फैसला सुनाया है.

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, कुंडला वसुंधरा सिटी का विकास वसुंधरा बिल्डर्स/कालोनाइजर द्वारा संबंधित अधिकारियों से आवश्यक स्वीकृति और अनुमति प्राप्त करने के बाद किया गया था. न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार नगर पालिका निगम अंबिकापुर ने 8 अगस्त 2007 को भवन निर्माण की अनुमति प्रदान की थी.

इसके बाद भवन निर्माण से संबंधित नवीन अनुमति के लिए 1 फरवरी 2011 को आवेदन प्रस्तुत किया गया. महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि इस आवेदन को न तो अंतिम रूप से अस्वीकार किया गया था और न ही उसका विधिवत निराकरण किया गया था. इसके बावजूद भवन निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ाई गई.

140 भवनों को पूर्ण करने की अनुमति का भी रिकॉर्ड

मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि नगर निगम आयुक्त ने 3 अगस्त 2011 के आदेश में लंबित आवेदन और भवन निर्माण की स्थिति को संज्ञान में लेते हुए निर्माणाधीन भवनों को पूर्ण किए जाने की अनुमति दी थी. न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार 140 भवन 4 जनवरी 2012 तक पूर्ण हो चुके थे.

शेष छह भवनों के लिए 10 फरवरी 2012 को नवीन अनुमति भी प्रदान की गई थी. इसके बाद भी राज्य शासन ने 4 जुलाई 2012 को भवन हटाने का आदेश जारी कर दिया. इसी आधार पर नगर निगम आयुक्त ने 7 दिसंबर 2016 को 110 भवन स्वामियों के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश जारी किया था.

प्रभावित परिवारों में बनी थी भय और असुरक्षा की स्थिति

इन प्रशासनिक आदेशों के कारण कुंडला वसुंधरा सिटी में रहने वाले परिवारों के बीच लंबे समय से अपने घरों के अस्तित्व को लेकर चिंता और असुरक्षा बनी हुई थी. प्रभावित भवन स्वामियों ने कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि प्रशासन के पास महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और बाद की कार्यवाहियां उपलब्ध थीं, लेकिन उन्हें उचित रूप से ध्यान में नहीं रखा गया. प्रभावित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिए बिना उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई.

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना

हाईकोर्ट ने मामले के संपूर्ण रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्य और दस्तावेज उपलब्ध थे, लेकिन उन पर उचित विचार नहीं किया गया. न्यायालय ने विशेष रूप से लंबित नवीन भवन अनुमति के आवेदन, 3 अगस्त 2011 के नगर निगम आयुक्त के आदेश, भवनों की पूर्णता की स्थिति और 140 भवनों से संबंधित Completion Certificate की कार्यवाही को महत्वपूर्ण माना.

हाईकोर्ट ने माना कि इन महत्वपूर्ण तथ्यों पर उचित विचार किए बिना राज्य शासन द्वारा भवन हटाने का आदेश पारित किया गया. न्यायालय ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना और इसी आधार पर कार्रवाई के मूल आदेश को कानून की कसौटी पर कायम नहीं माना.

110 भवन मालिकों को बड़ी राहत

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कुंडला वसुंधरा सिटी के 110 भवन स्वामियों और वहां रहने वाले परिवारों को वर्षों से चली आ रही भवन हटाने की कार्रवाई से बड़ी राहत मिली है. राज्य शासन का 4 जुलाई 2012 का भवन हटाने संबंधी आदेश और नगर निगम आयुक्त का 7 दिसंबर 2016 का आदेश निरस्त कर दिया गया है.

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