CG News: अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची सोनाबाई की कला, अब अपने ही गांव में संरक्षण की मोहताज, 15 लाख का संग्रहालय भी बंद
CG News: सरगुजा की लोककला को देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध भित्तिचित्र कलाकार सोनाबाई आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कला आज भी उनकी पहचान को जीवित रखे हुए है. हालांकि संरक्षण और नियमित देखरेख के अभाव में उनकी यह अनमोल कला धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच रही है. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सोनाबाई की स्मृति और कला को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उनके गांव पुहपुटरा में करीब 15 लाख रुपये की लागत से बनाया गया संग्रहालय वर्षों से बंद पड़ा है.
सरगुजा के लखनपुर क्षेत्र का पुहपुटरा गांव सोनाबाई की कर्मभूमि रहा है. वर्ष 2008 में उनके निधन के बाद भी उनके घर की दीवारों पर बनाए गए भित्तिचित्र उनकी कला और कल्पनाशक्ति की कहानी बयां करते हैं। मिट्टी, दीवारों और प्राकृतिक रंगों से तैयार किए गए. ये चित्र सरगुजा की लोक संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली की अनूठी झलक पेश करते हैं.
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची थी कला
सोनाबाई की कला की पहचान सरगुजा तक सीमित नहीं रही. उनकी भित्तिचित्र कला अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची. उन्होंने विदेशों में अपनी कला का प्रदर्शन करने के साथ प्रशिक्षण भी दिया. देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों के हाथों उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला. जिस कलाकार की कला को देश-दुनिया में सम्मान मिला, आज उसी की विरासत अपने गांव में संरक्षण की बाट जोह रही है.
15 लाख का संग्रहालय, लेकिन वर्षों से ताला
सोनाबाई की कला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पुहपुटरा में करीब 15 लाख रुपये की लागत से संग्रहालय का निर्माण कराया गया था। इसका मकसद सोनाबाई की कलाकृतियों, उपलब्धियों और उनकी कला को सुरक्षित रखना था, ताकि देश-दुनिया से आने वाले लोग उनकी कला को देख और समझ सकें. लेकिन करीब दस साल बीतने के बाद भी संग्रहालय का नियमित संचालन नहीं हो सका। भवन के दरवाजे पर ताला लटका हुआ है और जिस स्थान को सोनाबाई की कला का केंद्र बनना था, वह आज वीरान पड़ा है.
परिवार चाहता है नई पीढ़ी को मिले प्रशिक्षण
सोनाबाई का परिवार केवल संग्रहालय खोलने की मांग नहीं कर रहा है। परिवार चाहता है कि गांव के बच्चों और युवाओं को भित्तिचित्र कला का प्रशिक्षण दिया जाए। सोनाबाई की कलाकृतियों को सुरक्षित रखने के साथ उनकी कला पर शोध हो और पुहपुटरा को एक ऐसे कला केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहां लोग सरगुजा की इस अनूठी विरासत को करीब से समझ सकें। सोना बाई के बेटे दरोगा राजवाड़े परिवार का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं किए गए तो सोनाबाई की कला और उनकी विरासत को संभालने में दिक्कत होगी.
सरकार ने दिया संरक्षण का भरोसा
मामला सरकार तक भी पहुंच चुका है. संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने सोनाबाई की कला को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में काम करने की बात कही है. मंत्री ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए विभाग की ओर से कार्ययोजना तैयार करने की बात कही है. साथ ही सोनाबाई की स्मृति में बनाए गए संग्रहालय को भी शुरू करने का आश्वासन दिया है.
अब सवाल विरासत बचाने का
सोनाबाई की दीवारों पर उकेरी गई आकृतियां सिर्फ रंग और चित्र नहीं हैं, बल्कि सरगुजा की लोक संस्कृति की जीवंत पहचान हैं. अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक अपनी कला की छाप छोड़ने वाली सोनाबाई की विरासत आज अपने ही गांव में संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठी है.
अब देखना होगा कि सरकार के आश्वासन के बाद संग्रहालय का ताला कब खुलता है और सोनाबाई की कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कितने ठोस कदम उठाए जाते हैं. क्योंकि यह सिर्फ एक कलाकार की विरासत नहीं, बल्कि सरगुजा की उस लोककला की पहचान है, जिसे दुनिया ने सम्मान दिया है.