Ambikapur: VIP बंगलों की सजावट में लाखों के फूल, 1 साल बाद भी नहीं पेमेंट, 17 लाख रुपये रोकने का आरोप
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Ambikapur: नेताओं और बड़े अफसरों के बंगलों की सजावट हो या VIP के स्वागत में फूलों के गुलदस्ते. सरकारी आयोजनों में फूलों की कमी नहीं रही, लेकिन जिस फूल व्यापारी ने इन आयोजनों के लिए लाखों रुपये का सामान उपलब्ध कराया, उसके भुगतान की बारी आई तो एक साल बाद भी 17 लाख रुपये अटके हुए हैं.
मामला अंबिकापुर के कोलकाता फ्लावर्स के संचालक संतोष मंडल का है. संतोष मंडल का दावा है कि उद्यान विभाग ने दशहरा और दिवाली के दौरान नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और बड़े अधिकारियों के बंगलों की सजावट के लिए उससे बड़ी मात्रा में फूल खरीदे. विभाग के कहने पर उसने अपने कर्मचारियों को भेजकर इन बंगलों को फूलों से सजवाया.
सिर्फ बंगलों की सजावट तक ही मामला सीमित नहीं रहा. मैनपाट कार्निवाल जैसे बड़े आयोजन में VIP मेहमानों के स्वागत के लिए भी फूल और महंगे गुलदस्ते उपलब्ध कराए गए. वहीं अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में नेताओं और मंत्रियों के आगमन के दौरान भी उद्यान विभाग ने उससे सैकड़ों की संख्या में गुलदस्ते खरीदे.
व्यापारी का कहना है कि शहर में आयोजित कई अन्य बड़े सरकारी कार्यक्रमों के लिए भी उद्यान विभाग ने उससे फूल और गुलदस्ते लिए, लेकिन इनका भुगतान अब तक नहीं किया गया.
फूल दिए, सजावट कराई… अब भुगतान के लिए अधिकारियों के चक्कर
संतोष मंडल के मुताबिक वह अपने बकाया भुगतान के लिए उद्यान विभाग के अधिकारियों के सामने कई बार गुहार लगा चुका है. लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी करीब 17 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका है. व्यापारी का कहना है कि फूल और सजावट का काम तत्काल किया गया, सामान खरीदा गया, कर्मचारियों को लगाया गया, लेकिन भुगतान अटक जाने से उसकी पूरी पूंजी फंस गई है.
जिससे पैसा लेना था, उसे भुगतान नहीं… दूसरे व्यापारियों से खरीदारी का आरोप
सबसे बड़ा सवाल अब उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है. संतोष मंडल का आरोप है कि उसका पुराना भुगतान लंबित होने के बावजूद विभाग दूसरे फूल व्यापारियों से फूल खरीद रहा है. व्यापारी का सवाल है कि जब उसका लाखों रुपये का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है, तो विभाग नए व्यापारियों से खरीदारी कैसे और किस आधार पर कर रहा है?
10 लाख का बैंक लोन लेकर शुरू किया कारोबार
संतोष मंडल के मुताबिक उसने फूलों का कारोबार शुरू करने के लिए बैंक से करीब 10 लाख रुपये का कर्ज लिया था. सरकारी आयोजनों के लिए फूलों की आपूर्ति करते हुए उसने अपनी पूंजी और उधार की रकम कारोबार में लगाई, लेकिन अब 17 लाख रुपये का भुगतान अटकने से आर्थिक संकट गहरा गया है. उसका कहना है कि एक तरफ बैंक का कर्ज चुकाना है और दूसरी तरफ कारोबार चलाने के लिए पूंजी चाहिए. लेकिन विभाग से भुगतान नहीं मिलने के कारण दोनों मोर्चों पर परेशानी खड़ी हो गई है.
सूरजपुर में भी 3 लाख का भुगतान अटका
संतोष मंडल का यह भी कहना है कि सूरजपुर जिले से भी करीब 3 लाख रुपये का भुगतान लंबित है. यानी अलग-अलग सरकारी आयोजनों में फूल और गुलदस्ते उपलब्ध कराने के बावजूद उसका लाखों रुपये का पैसा सरकारी भुगतान व्यवस्था में फंसा हुआ है.
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