Ambikapur: सरकारी अस्पताल में टाइफाइड की जांच नहीं, लेना पड़ता है प्राइवेट लैब का सहारा, मरीज परेशान
अंबिकापुर
Ambikapur Typhoid Testing Unavailable: सरगुजा जिले में इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ा हुआ है. इसी बीच अंबिकापुर के नवापारा स्थित सरकारी अस्पताल में टाइफाइड और स्क्रब टायफस की जांच नहीं होने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जांच के लिए मरीजों को निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है.
बड़ी संख्या में मरीज जांच के लिए आते
नवापारा के सरकारी अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं. अस्पताल में पहले विभिन्न प्रकार की जांच की सुविधा उपलब्ध होने की बात सामने आ रही है, लेकिन HLL कंपनी के साथ जांच व्यवस्था के अनुबंध के बाद यहां अब मुख्य रूप से ब्लड सैंपल कलेक्शन किया जा रहा है.
5 किलोमीटर दूर भेजे जा रहे सैंपल
अस्पताल में लिए गए ब्लड सैंपल को जांच के लिए करीब 5 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में HLL कंपनी द्वारा संचालित लैब में भेजा जा रहा है. कंपनी की ओर से मोबाइल के माध्यम से जांच रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, लेकिन मरीजों का कहना है कि कई बार मोबाइल पर रिपोर्ट समय पर नहीं पहुंचती. ऐसी स्थिति में उन्हें रिपोर्ट के लिए 24 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है.
टाइफाइड की जांच के लिए निजी लैब का सहारा
मौसम बदलने के साथ बड़ी संख्या में लोग बुखार और दूसरी मौसमी बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में टाइफाइड की जांच की जरूरत बढ़ गई है. लेकिन सरकारी अस्पताल में जांच नहीं होने के कारण मरीजों को निजी लैब में जाकर जांच करानी पड़ रही है.इससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है.
स्क्रब टायफस की जांच को लेकर भी परेशानी
नवापारा सरकारी अस्पताल में स्क्रब टायफस की जांच नहीं होने की बात भी सामने आई है. बीमारी के लक्षण वाले मरीजों और उनके परिजनों को जांच के लिए दूसरी जगह जाना पड़ रहा है. इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जांच सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
व्यवस्था पर सवाल
अस्पताल में जांच और सैंपल देने के लिए मरीजों की लंबी कतार देखी जा रही है. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि सैंपल लेने के बाद जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध हो जाए तो उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन रिपोर्ट में देरी होने पर इलाज की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है. इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के टेक्नीशियन, मरीजों के परिजन और HLL कंपनी के कर्मचारियों से बातचीत की गई, कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि रिजेंट नहीं होने से जांच नहीं हो पा रहीं है.
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